सबलगढ़ शहर में जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है, जिससे यहां की करीब 40 हजार की आबादी नारकीय जीवन व्यतीत करने को मजबूर है। कुल 18 वार्डों में फैले इस नगरीय क्षेत्र में नालियों का निर्माण बिना किसी उचित सर्वे और सही ढलान के कर दिया गया है। स्थिति यह है कि हल्की सी बारिश होते ही शहर की मुख्य सड़कें तालाब बन जाती हैं और लोगों का आना-जाना तक मुश्किल हो जाता है।
लाखों का सफाई बजट और कागजी दावे
नगर पालिका प्रशासन की ओर से सफाई कार्यों पर हर साल लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन मैदानी हकीकत में कोई सुधार देखने को नहीं मिलता है। नालियों की नियमित सफाई न होने और जल निकास के रास्ते बंद होने के कारण बारिश का गंदा पानी सीधे रहवासियों के घरों में प्रवेश कर जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस जलभराव की वजह से हर साल उनका हजारों रुपए का घरेलू सामान खराब हो जाता है।
ढाई दशकों से बनी हुई है गंभीर समस्या
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि यह परेशानी कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले 20 से 25 सालों से लगातार बनी हुई है। इसके बावजूद नगर पालिका के सीएमओ, जिम्मेदार इंजीनियर और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस गंभीर मसले पर पूरी तरह से चुप्पी साधे बैठे हैं। गलियों और मुख्य मार्गों पर दो से तीन फीट तक पानी भर जाने के कारण लोगों को अपने ही घरों में कैद होकर रहना पड़ता है और पानी उतरने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।
प्रमुख प्रभावित इलाके और गलियां
सबलगढ़ शहर के लगभग सभी प्रमुख हिस्सों में जलभराव का यही हाल है। इनमें मुख्य रूप से मंडी संतर के सभी पांच वार्ड, एमएस रोड पर कृषि विकास एवं वन विभाग के सामने का हिस्सा, संजय नगर, कुंड रोड, गंज रोड और देवी मंदिर रोड शामिल हैं। इसके अलावा अंबेडकर पार्क बेनीपुर रोड, सीतापुर बस्ती, पिपरघान रोड, राम मंदिर के पीछे की सड़क और रामपुर गुरुद्वारा रोड पर भी बारिश के दौरान हालात बद से बदतर हो जाते हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!