मुरैना जिले के प्रसिद्ध ऐंती पर्वत पर स्थित प्राचीन शनि धाम में शनिवार को शनि अमावस्या के पावन पर्व पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। अहले सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों का तांता लगा रहा। इस धार्मिक आयोजन में हिस्सा लेने के लिए मध्यप्रदेश के अलावा राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे दूर-दराज के राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हैं।
प्रशासन ने संभाली कमान, चौदह सौ कर्मी तैनात
शनि धाम पर लगने वाले इस बड़े मेले को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के कड़े इंतजाम किए हैं। अपर कलेक्टर अश्वनी कुमार रावत के मुताबिक, इस बार के आयोजन में करीब दस लाख श्रद्धालुओं के यहां आने का आकलन किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने और सुगम दर्शन सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक महकमे के लगभग चौदह सौ अधिकारियों व कर्मचारियों को मुस्तैद किया गया है, जिन्हें अलग-अलग मोर्चों पर जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
रामायण काल और त्रेतायुग से जुड़ी है धाम की महिमा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मुरैना का यह शनि मंदिर त्रेतायुग और रामायण काल से जुड़ा हुआ एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। मंदिर के महंत रामदास जी जानकारी देते हैं कि यहां स्थापित भगवान शनिदेव की प्रतिमा मानव रूप में विराजमान है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब हनुमान जी माता सीता की तलाश में लंका गए थे, तब रावण की कैद से शनिदेव को मुक्त कराया था। इसके बाद शनिदेव ने हनुमान जी से ऐसी सुरक्षित जगह पर पहुंचाने का निवेदन किया था, जहां रावण का प्रभाव न पहुंच सके।
मान्यता है कि तब हनुमान जी ने अपनी शक्ति से शनिदेव को लंका से दूर फेंका था, जो मुरैना के पुराने विंध्याचल यानी ऐंती पर्वत पर आकर स्थापित हुए। इसी स्थान पर उन्होंने तपस्या कर पुनः अपनी शक्तियां प्राप्त की थीं, जिसके चलते यह मंदिर देश भर के सनातन प्रेमियों और शनि भक्तों के लिए अगाध आस्था का केंद्र बना हुआ है।
साठ साल पुराना सेवा कार्य और भंडारे का आयोजन
मेले के दौरान मंदिर परिसर में आने वाले भक्तों के लिए महाप्रसाद और भंडारे का भी प्रबंध किया गया है। राजस्थान के सिरसा से आए विवेक गर्ग ने बताया कि उनका शनि भंडारा ट्रस्ट पिछले पचास वर्षों से निरंतर यहां आकर सेवा कार्य कर रहा है। राजस्थान के समर्पित लोग हर साल शनि अमावस्या पर मिलकर इस भंडारे को संचालित करते हैं।
विवेक गर्ग का कहना है कि उन्हें शनिदेव के आशीर्वाद से जीवन में काफी सफलता और शांति प्राप्त हुई है, और इसी कृतज्ञता के भाव के साथ वे हर वर्ष यहां आकर श्रद्धालुओं की सेवा करते हैं तथा प्रसाद वितरण का कार्य संभालते हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!