असुरक्षित भवनों में पढ़ाई पर लगी रोक

मुरैना जिले के शासकीय महाविद्यालयों में जर्जर और क्षतिग्रस्त हो चुके भवनों में अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ रहे विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में कॉलेजों और छात्रावास परिसरों में हुई घटनाओं के बाद शासन ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से ऐसे भवनों में कक्षाएं बंद कराने के निर्देश दिए हैं।

बैरीकेडिंग लगाकर प्रवेश रोकने के निर्देश

उच्च शिक्षा आयुक्त द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि क्षतिग्रस्त कमरे, प्रयोगशालाएं और भवन परिसर छात्र-छात्राओं, शिक्षकों के साथ-साथ अन्य स्टाफ सदस्यों के लिए भी गंभीर खतरा साबित हो सकते हैं। ऐसे जोखिम भरे स्थलों पर किसी भी प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियां संचालित न किए जाने की हिदायत दी गई है। इसके साथ ही, इन असुरक्षित हिस्सों के आसपास बैरिकेडिंग करके विद्यार्थियों और आम लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह पाबंदी लगाने को कहा गया है।

निर्माण एजेंसियां करेंगी तकनीकी जांच

प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित निर्माण एजेंसियों को कॉलेजों और छात्रावासों के जर्जर हिस्सों का तकनीकी परीक्षण करने के आदेश जारी किए गए हैं। जांच प्रक्रिया में जिन इमारतों की मरम्मत या रिनोवेशन की आवश्यकता सामने आएगी, वहां प्राथमिकता के आधार पर सुधार कार्य पूरा कराया जाएगा। विभाग ने यह भी साफ किया है कि छात्र हित और उनकी सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बदलेगा टाइम-टेबल और होगी वैकल्पिक व्यवस्था

खतरनाक कमरों को बंद किए जाने से पठन-पाठन पर कोई असर न पड़े, इसके लिए महाविद्यालयों में उपलब्ध सुरक्षित कमरों के आधार पर समय-सारणी यानी टाइम-टेबल में बदलाव किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर एक ही सुरक्षित कमरे का इस्तेमाल अलग-अलग कक्षाओं के संचालन के लिए किया जा सकेगा। इसके अलावा, यदि किसी कॉलेज में पर्याप्त सुरक्षित कमरे नहीं मिलते हैं, तो जिला प्रशासन द्वारा किसी अन्य वैकल्पिक भवन या स्थान का इंतजाम किया जाएगा।