मुरैना जिले के सबलगढ़ में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां पुराने अस्पताल परिसर के भीतर स्थित लगभग 40 साल पुरानी लैब की इमारत पूरी तरह जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। देखरेख के अभाव में इस पुरानी संरचना की हालत लगातार बदतर होती जा रही है।

दीवारों और छत में आई बड़ी दरारें

लगातार हो रही बारिश के चलते इस पुरानी बिल्डिंग को भारी नुकसान पहुंचा है। टीबी कक्ष के पीछे की दीवार और छत काफी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिसमें जगह-जगह बड़ी दरारें उभर आई हैं। इन दीवारों के भीतर लगे लोहे के सरिए भी अब जंग लगने के कारण बाहर झांकने लगे हैं।

पानी टपकने और जमा होने से बढ़ा खतरा

अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि बरसात के मौसम में भवन की छत से लगातार पानी टपकता रहता है और आसपास जलभराव की स्थिति बन जाती है। शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां आम लोगों और मरीजों की आवाजाही भी लगातार बनी रहती है, जिससे कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है।

कर्मचारियों के मुताबिक पिछले छह-सात वर्षों से इस भवन की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की इंजीनियरिंग शाखा की तरफ से इसकी मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

बंद पड़ा है लाखों की लागत से बना पोस्टमार्टम रूम

इसी पुराने अस्पताल परिसर में करीब पांच साल पहले लगभग 15 लाख रुपए खर्च करके एक नया पोस्टमार्टम रूम तैयार किया गया था। हालांकि, स्वास्थ्य कर्मियों के विरोध के चलते इसका संचालन कभी शुरू नहीं हो पाया। वर्तमान में अधिकांश कर्मचारी आसपास बने पुराने और क्षतिग्रस्त सरकारी क्वार्टरों को छोड़कर जा चुके हैं, ऐसे में अब इस बंद पड़े पोस्टमार्टम रूम के उपयोग की मांग भी उठने लगी है।

स्थानीय नागरिक केदार मौर्य का कहना है कि पोस्टमार्टम रूम के समीप स्थित इस भवन के दरवाजे टूट चुके हैं और छत तथा दीवारों की ईंटें गिर रही हैं। नागरिकों का मानना है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण यहां कभी भी कोई बड़ा जानलेवा हादसा घटित हो सकता है।

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सीबीएमओ डॉ. आरएन शर्मा ने स्वीकार किया है कि पुराने अस्पताल का लैब कक्ष क्षतिग्रस्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि भवन की वर्तमान स्थिति से उच्च स्तर पर अवगत कराते हुए नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।