क्वारी नदी के तट पर जुटा श्रद्धालुओं का जनसमूह

श्राद्ध पक्ष के अंतिम दिन शनिवार को मुरैना स्थित क्वारी नदी के घाटों पर सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे लोगों ने नदी के तट पर पहुंचकर अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण किया और पूरे विधि-विधान के साथ तर्पण व अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए।

इस दौरान नदी किनारे का पूरा इलाका धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल में रंगा नजर आया। श्रद्धालुओं ने अपने परिजनों की आत्मा की शांति के साथ-साथ अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

सनातन परंपरा में पितृ पक्ष का महत्व

हिंदू धर्म मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष की अवधि पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने और उन्हें याद करने का सबसे खास समय होती है। इस दौरान नदी, सरोवरों और अन्य पवित्र स्थलों पर पहुंचकर पिंडदान, श्राद्ध और दान-पुण्य करने की प्राचीन परंपरा रही है, जिसका निर्वहन क्वारी नदी के तट पर भी बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने किया।

सनातन धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। यह अवधि अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर देती है। इन कर्मों के माध्यम से लोग अपने दिवंगत परिजनों का स्मरण करते हैं और परिवार की परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं। - पंडित बलदाऊ शास्त्री

अब रविवार से शुरू होगी शारदीय नवरात्र की धूम

पितृ पक्ष के अंतिम दिन विभिन्न धार्मिक कर्मकांड पूरा करने के साथ ही लोगों ने अपने पूर्वजों को विदाई दी। इस अवसर पर घर-घर में पारिवारिक परंपराओं का पालन करते हुए अनुष्ठान किए गए।

दूसरी ओर, अब शारदीय नवरात्र को लेकर शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक तैयारियां जोरों पर हैं। रविवार को घरों में कलश यानी घट स्थापना की जाएगी और विभिन्न स्थानों पर माता रानी के भव्य दुर्गा पांडाल सजाए जाएंगे, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बन गया है।