अंचल में पितृ पक्ष का आरंभ भाद्रपद पूर्णिमा के साथ हो गया है। इस सोलह दिवसीय विशेष अवधि के दौरान सनातन परंपरा के अनुसार लोग अपने पूर्वजों को याद कर रहे हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए विभिन्न अनुष्ठान निभाए जा रहे हैं।
तालाबों और नदियों के तट पर तर्पण की शुरुआत
शनिवार से शहर और आसपास के इलाकों में परिवारों के मुखियाओं ने जल स्रोतों का रुख करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में पंडित लीलाकृष्ण शास्त्री के मार्गदर्शन में स्थानीय तालाब पर तर्पण अनुष्ठान संपन्न कराया गया, जहां परिजनों ने विधि-विधान के साथ अपने पितरों के नाम पर जल अर्पित किया।
तिथि के अनुसार तय होते हैं श्राद्ध कर्म
ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्णकांत शास्त्री के मुताबिक, पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म हमेशा पूर्वजों की मृत्यु तिथि के आधार पर ही तय किए जाते हैं। हालांकि, यदि किसी को अपने परिजन की सही मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो वे आश्विन मास की अमावस्या के दिन सर्वपितृ श्राद्ध के रूप में यह अनुष्ठान पूरा कर सकते हैं।
उन्होंने आगे जानकारी दी कि इस पखवाड़े में श्रीमद्भागवत गीता के सातवें अध्याय का पाठ करने की भी धार्मिक मान्यता है। इसके अलावा, परिवार में नाना-नानी का श्राद्ध आश्विन कृष्ण प्रतिपदा के दिन करना बेहद शुभ माना गया है।
गयाजी में पिंडदान का विशेष धार्मिक महत्व
अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति और शांति के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बिहार के गया भी जाते हैं। हिंदू धर्म में गयाजी स्थित फल्गु नदी के तट, विष्णुपद मंदिर और पवित्र अक्षयवट को पिंडदान और श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना गया है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!