मुरैना जिले के सबलगढ़ में नागरिकों को ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित 12.9 किलोमीटर लंबा बाईपास प्रोजेक्ट प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों के कारण पिछले 21 महीनों से अधर में लटका हुआ है। इस महत्वपूर्ण परियोजना पर लगभग 250 करोड़ रुपए की लागत आनी है, लेकिन किसानों को उनकी अधिग्रहित जमीन का मुआवजा समय पर न मिल पाने के कारण जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
11 गांवों की जमीन का हुआ है अधिग्रहण
इस बाईपास मार्ग के निर्माण के लिए करीब 21 महीने पहले 11 गांवों की 35.25 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि, लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं और कागजी औपचारिकताओं के चलते अब तक केवल 34 किसानों को ही मुआवजे की राशि का भुगतान हो पाया है। नेशनल हाईवे 552 एक्सटेंशन से जुड़े अधिकारियों का तर्क है कि किसानों के बैंक खातों के मिलान और अन्य जरूरी दस्तावेजों की औपचारिकताएं पूरी करने में समय लग रहा है।
शहर के भीतर लग रहा भीषण ट्रैफिक जाम
परियोजना के ठप रहने का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। सबलगढ़ शहर के मुख्य मार्गों से रोजाना भारी वाहनों के गुजरने के कारण तीन-तीन घंटे तक के लंबे जाम लग रहे हैं। प्रस्तावित योजना के तहत यह 12 मीटर चौड़ा बाईपास डबेरा गांव के पास से शुरू होकर काजोना घाटी पर मुख्य मार्ग से मिलना है। इसके बन जाने से शिवपुरी, श्योपुर और जयपुर की ओर जाने वाले भारी वाहन शहर के बाहर से ही निकल जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी राहत मिलेगी।
अधिकारियों ने जल्द भुगतान का दिया भरोसा
मुआवजे के वितरण को लेकर नेशनल हाईवे के सहायक यंत्री विजय अवस्थी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि कुल 29 करोड़ रुपए के मुआवजे में से 10 करोड़ रुपए की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है, लेकिन कुछ ग्रामीण बैंक खातों से जुड़ी तकनीकी बाधाओं के कारण प्रक्रिया धीमी हुई है।
वहीं, मामले पर जानकारी देते हुए एसडीएम मेघा तिवारी ने बताया कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी को कुल 90 किसानों के बैंक खाते भेजे गए थे, जिनमें से 34 किसानों के खातों में राशि पहुंच चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि शेष बचे हुए किसानों के खातों में भी जल्द ही मुआवजे की राशि जमा करवा दी जाएगी ताकि निर्माण कार्य में आ रही बाधा दूर हो सके।






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बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!