अंबाह क्षेत्र में इन दिनों किसानों को खाद की किल्लत के साथ-साथ ऑनलाइन व्यवस्था की खामियों का भी सामना करना पड़ रहा है। ई-टोकन के जरिए खाद वितरण प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है, जिससे स्थानीय किसानों में भारी रोष व्याप्त है।
घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटे किसान
जल का नगरा गांव के रहने वाले किसान रामनिवास शर्मा ने इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई है। उनका कहना है कि वे कई दिनों तक सरकारी खाद गोदाम के चक्कर काटते रहे, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। सुबह से शाम तक इंतजार करने के बावजूद उन्हें खाद नहीं दी गई।
टोकन जमा करवाकर उठाव का फर्जी मैसेज भेजने का आरोप
पीड़ित किसान के मुताबिक, उन्होंने 14 अक्टूबर को खाद के लिए ई-टोकन लिया था। गोदाम पर उनका टोकन भी जमा करवा लिया गया, लेकिन खाद देने के बजाय टालमटोल की गई। कुछ समय बाद उनके मोबाइल फोन पर खाद मिलने का मैसेज आ गया, जबकि गोदाम का स्टॉक शून्य बताया गया।
किसानों का आरोप है कि टोकन की अवधि समाप्त होने के अंतिम दिन उन्हें गोदाम पर बैठाए रखा जाता है। इस दौरान कर्मचारियों द्वारा टोकन स्कैन कर कागजों में खाद का उठाव दर्ज कर लिया जाता है और सर्वर धीमा होने का बहाना बनाकर किसानों को वापस लौटा दिया जाता है।
बाजार से ऊंचे दामों पर खाद खरीदने की मजबूरी
सरकारी गोदामों से समय पर खाद न मिलने के कारण किसानों को मजबूरन खुले बाजार से अधिक दाम चुकाकर खाद खरीदनी पड़ रही है। इस आर्थिक नुकसान और धोखाधड़ी से परेशान होकर रामनिवास शर्मा ने सीएम हेल्पलाइन पर अपनी शिकायत दर्ज कराई है और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए खाद गोदाम प्रभारी उमेश बरेलिया ने कहा कि यदि ऐसा कोई मामला सामने आया है तो वे इसकी पूरी जांच करवाएंगे। वहीं, एसडीएम प्रतिज्ञा शर्मा का कहना है कि अभी तक कोई किसान व्यक्तिगत रूप से उनके पास शिकायत लेकर नहीं आया है। शिकायत मिलने पर उचित कार्रवाई और समाधान किया जाएगा।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!