सबलगढ़ में शुक्रवार को महात्मा गांधी की 157वीं और देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर स्थानीय गांधी पार्क स्थित ब्लॉक कांग्रेस कार्यालय में सुबह साढ़े ग्यारह बजे एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

गांधी पार्क में जुटे कांग्रेस कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि

आयोजन के दौरान क्षेत्रीय विधायक बैजनाथ कुशवाहा समेत तमाम स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस मौके पर वक्ताओं ने दोनों महापुरुषों के जीवन दर्शन को आत्मसात करने का आह्वान किया।

चंपारण आंदोलन से पड़ी स्वतंत्रता संग्राम की नींव

कार्यक्रम में महात्मा गांधी के ऐतिहासिक संघर्षों को याद किया गया। चर्चा के दौरान बताया गया कि बापू द्वारा शुरू किया गया चंपारण का नीलहा आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक मजबूत आधार स्तंभ बना था। ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ यह देश की पहली बड़ी अहिंसक चुनौती थी, जिसने औपनिवेशिक शासन की जड़ों को हिलाकर रख दिया था।

हरित क्रांति से देश को मिली आर्थिक मजबूती

कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के योगदान को भी शिद्दत से याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि शास्त्री जी के नेतृत्व में आई हरित क्रांति ने भारत को आर्थिक और कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का काम किया। यह एक ऐसा कदम था जिसने देश को गंभीर खाद्यान्न संकट से उबारा और भूख तथा गरीबी के विरुद्ध प्रभावी जंग लड़ी।

इतिहासकारों के हवाले से कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि वर्ष 1917 का चंपारण नील सत्याग्रह और 1960 के दशक की हरित क्रांति भारत के आधुनिक इतिहास की दो ऐसी महान क्रांतियां हैं, जिन्होंने देश की दिशा और दशा हमेशा के लिए बदल दी।