मुरैना जिले के सबलगढ़ कस्बे में करीब ढाई लाख की आबादी के लिए बना मौजूदा बस स्टैंड शहर के मध्य में स्थित होने के कारण गले की फांस बन गया है। इस मुख्य केंद्र पर सुविधाओं का भारी अभाव है, जिसके चलते रोजाना यात्रियों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बाजारों में बसों के रुकने से बिगड़ती है ट्रैफिक व्यवस्था
क्षेत्र में कोई सुव्यवस्थित बस अड्डा न होने की वजह से बसें सीधे बाजारों के बीचोंबीच खड़ी होती हैं, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। यात्रियों को सड़कों के किनारे खड़े होकर गाड़ियों का इंतजार करना पड़ता है, जिससे आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है। दोपहर और शाम के वक्त हालात इतने बदतर हो जाते हैं कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
स्थिति को और बिगाड़ने में ई-रिक्शा और ऑटो की अनियंत्रित आवाजाही भी बड़ी वजह है। राम मंदिर तिराहे और मुख्य बस स्टैंड के पास ये वाहन आड़े-तिरछे खड़े रहते हैं, जिससे चौराहों की सुंदरता पर तो असर पड़ ही रहा है, साथ ही ट्रैफिक नियमों की धज्जियां भी उड़ रही हैं।
ढाई दशक पुरानी योजना आज भी अधूरी
स्थानीय इतिहास के मुताबिक करीब 25 साल पहले पशु चिकित्सा विभाग की जमीन को बस अड्डे के निर्माण के लिए चिन्हित किया गया था। इस भूखंड पर नगर पालिका ने दुकानें तो खड़ी कर दीं, लेकिन आज तक यात्रियों के लिए किसी प्रकार की बुनियादी बस स्टैंड सुविधा विकसित नहीं की जा सकी।
वर्तमान परिसर में न तो यात्रियों के बैठने की ढंग की व्यवस्था है और न ही चालकों के लिए कोई सहूलियत। बसों के आवागमन से जुड़ी जानकारी देने वाले डिस्प्ले बोर्ड तक यहां नहीं लगे हैं। इसके अलावा शहर में मंडी संतर नंबर 5 के सामने यात्री बसें और नंबर 3 के समीप भारी वाहन खड़े होने से कई अघोषित बस अड्डे चल रहे हैं।
बाईपास पर स्टैंड ले जाने की उठी मांग
नगर से हर रोज एक00 से अधिक सामान्य बसें और 10 से 12 स्लीपर बसें संचालित होती हैं, लेकिन यात्रियों को कोई सुविधा नहीं मिल रही। जाम के नासूर बन चुके इस संकट को टालने के लिए बस स्टैंड को तुरंत नवीन बाईपास मार्ग पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। - रोशन लाल हरदैनिया, स्थानीय निवासी






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!