प्रकृति से जुड़ाव और शिक्षकों की अहम भूमिका

मुरैना जिले के पीएम श्री विद्यालय गलेथ में शनिवार को पर्यावरण संरक्षण विषय पर एक महत्वपूर्ण चर्चा का आयोजन किया गया। इस दौरान बिस्मिल फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं पूर्व प्राचार्य डॉ. नरेश सिंह सिकरवार ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्कूलों को पर्यावरण बचाने वाले जनआंदोलन का मुख्य केंद्र बनना चाहिए और शिक्षकों को इसमें 'चेंज मेकर' के तौर पर अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

विद्यार्थियों को किताबों से बाहर लाकर दें जिम्मेदारी

डॉ. सिकरवार ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि पर्यावरण की सुरक्षा महज़ सरकार या किसी एक संस्था का जिम्मा नहीं है, बल्कि यह हर एक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक ही सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें सीधे तौर पर प्रकृति से जोड़ा जाना चाहिए। छात्र-छात्राओं को पौधे लगाने और उनकी নিয়মিত देखभाल करने का अवसर मिलने से उनमें सामाजिक सहभागिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही जैसे गुण विकसित होते हैं।

जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए जनभागीदारी जरूरी

वर्तमान समय में लगातार बढ़ रहा तापमान, वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और कम होती हरियाली जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए जनसहभागिता बेहद आवश्यक है। विद्यालय स्तर पर पौधारोपण के साथ-साथ जल संरक्षण और स्वच्छता से जुड़ी गतिविधियों का भी नियमित संचालन किया जाना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान प्रभारी प्राचार्य भारत सिंह ने भी विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि केवल पौधे लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि उनके बड़ा होकर वृक्ष बनने तक उनकी पूरी सुरक्षा करनी चाहिए।

प्रभारी प्राचार्य ने छात्र-छात्राओं से यह भी अपील की वे अपने परिवार के सदस्यों और आस-पास के लोगों को भी पर्यावरण बचाने के लिए जागरूक करें। इस अवसर पर विनोद सिकरवार, रामबरन शर्मा, जितेंद्र सिकरवार, शिवराज जालौन, राजेंद्र शर्मा, विनोद शर्मा, रवि राजपूत और रश्मि अग्निहोत्री समेत कई शिक्षक, बिस्मिल संस्थान के पदाधिकारी, सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।