क्वारी नदी तट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

शनिवार की सुबह से ही मुरैना जिले के क्वारी नदी स्थित तुतवास घाट पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति की कामना के लिए यहां एकत्र हुए थे।

घाट पर विधि-विधान के साथ तर्पण किया गया। श्रद्धालुओं ने जल अर्पित कर अपने पितरों को याद किया और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इस दौरान नदी घाट पर पूरा माहौल पूरी तरह से धार्मिक नजर आया।

पंडित विद्याचरण उपाध्याय ने बताए इस दिन के धार्मिक मायने

धार्मिक विषयों के जानकार पंडित विद्याचरण उपाध्याय ने जानकारी देते हुए बताया कि सर्वपितृ अमावस्या का दिन पितृ पक्ष का अंतिम दिवस होता है। इस खास तिथि का सनातन धर्म में विशेष महत्व माना गया है।

सर्वपितृ अमावस्या के दिन उन अज्ञात पूर्वजों के लिए भी श्राद्ध और तर्पण किया जाता है जिनकी पुण्यतिथि की सही जानकारी परिजनों को नहीं होती है।

उन्होंने आगे कहा कि इस अवसर पर तर्पण करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। लोग अपने पुरखों द्वारा दिखाए गए मार्ग और संस्कारों को याद करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।

पितृ पक्ष का हुआ समापन

तुतवास घाट पर तमाम लोगों ने अपनी परंपराओं का निर्वहन करते हुए पितरों को विदाई दी। इसी के साथ सोलह दिनों तक चलने वाला पितृ पक्ष का यह विशेष कालखंड आज सर्वपितृ अमावस्या के पावन पर्व के साथ संपन्न हो गया।