सोमवार की शाम मुरैना शहर के व्यस्तम एमएस रोड स्थित पुराने बस स्टैंड चौराहे पर मजिस्ट्रेट चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इस दौरान पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई यातायात नियमों तक सीमित न रहकर नगर निगम की सियासत का अखाड़ा बन गई। चेकिंग के बीच ही स्थानीय राजनीति से जुड़े कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

सभापति की गाड़ी पर कसा शिकंजा, कटा चालान

चेकिंग पॉइंट पर जब नगर निगम सभापति राधारमण दंडोतिया की कार वहां से गुजरी, तो पुलिस ने उसे रोक लिया। गाड़ी पर हूटर लगा हुआ था, जिसे पुलिस ने नियमों के विरुद्ध पाया। इसके बाद पुलिस ने औपचारिकता पूरी करते हुए सभापति की गाड़ी पर ढाई हजार रुपए का चालान काट दिया।

कार्रवाई के बाद सभापति राधारमण दंडोतिया ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि यदि गाड़ी पर लगा हूटर नियमों के खिलाफ है, तो चालान काटने पर उन्हें किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है। उन्होंने जुर्माना भरने की बात स्वीकार की, लेकिन उनका मुख्य विरोध कार्रवाई के दौरान बरती गई असमानता को लेकर था।

महापौर की कार पर नहीं हुई जांच, सभापति ने उठाए सवाल

विवाद तब गहरा गया जब सभापति के अनुसार उसी चेकिंग पॉइंट पर महापौर शारदा सोलंकी की कार भी पहुंची। सभापति का दावा है कि पुलिस द्वारा उनकी कार की जांच की जा रही थी, तभी महापौर की गाड़ी बिना रुके वहां से तेजी से आगे निकल गई, जिससे उसकी जांच नहीं हो सकी।

नियम विरुद्ध हूटर है तो दोनों वाहनों पर कार्रवाई होनी चाहिए। हमारी कार का चालान हुआ, इससे हमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन कार्रवाई राजनीतिक भेदभाव के आधार पर नहीं होनी चाहिए।

कांग्रेस और भाजपा का एंगल और भेदभाव के आरोप

घटना के बाद सभापति ने खुले तौर पर प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस पार्टी से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए उनकी गाड़ी को रोककर चालान बनाया गया। वहीं दूसरी ओर, महापौर भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हैं, जिसके चलते उनकी हूटर लगी गाड़ी को रोकने की हिम्मत पुलिस नहीं जुटा पाई।

इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। इस संबंध में महापौर का पक्ष जानने के लिए फोन कॉल और संदेश भेजे गए, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी थी।