चंबल नदी के रास्ते होने वाले अवैध रेत के कारोबार को पूरी तरह रोकने के लिए प्रशासन ने अब तकनीकी हथियारों का उपयोग शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में मुरैना वन विभाग ने राजघाट के समीप स्थित संवेदनशील रिठौरा घाट पर आधुनिक एआई (AI) कैमरे स्थापित किए हैं।
संवेदनशील इलाकों पर होगी हाई-टेक नजर
फिलहाल इस इलाके की निगरानी के लिए दो अत्याधुनिक कैमरे सक्रिय किए गए हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और संवेदनशीलता को भांपते हुए दो और अतिरिक्त ड्रोन उपलब्ध कराने के लिए अपने उच्चाधिकारियों को औपचारिक पत्र भेजा है।
सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना और डीएफओ हरीश चंद्र बघेल ने संयुक्त रूप से राजघाट पहुंचकर पूरे इलाके का मुआयना किया। इस दौरान अधिकारियों ने खुद ड्रोन उड़ाकर चंबल नदी के घाटों और आसपास के रास्तों का जायजा लिया। निरीक्षण के वक्त मौके पर अवैध उत्खनन या वाहनों की आवाजाही जैसी कोई संदिग्ध गतिविधि देखने को नहीं मिली और न ही वहां टायरों के निशान पाए गए।
अधिकारियों ने परखी सुरक्षा व्यवस्था
एसपी धर्मराज मीना ने राजघाट पर ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा बलों को ड्रोन कैमरों के संचालन और निगरानी के संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में पहले बेखौफ होकर रेत का अवैध उत्खनन किया जाता था, वहां अब पूरी तरह शांति बनी हुई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन का मुख्य लक्ष्य भविष्य में भी इस प्रकार की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है। इसके लिए सुरक्षा बलों को लगातार अलर्ट रहने और गश्त का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
437 किलोमीटर लंबे अभयारण्य क्षेत्र में चुनौती
डीएफओ हरीश चंद्र बघेल के अनुसार, चंबल अभयारण्य का दायरा लगभग 437 किलोमीटर तक फैला हुआ है। इतने विशाल क्षेत्र में हर वक्त मैनुअल निगरानी करना एक बड़ी चुनौती है, इसलिए सबसे ज्यादा संवेदनशील और रेत माफिया के लिहाज से सक्रिय रहने वाले घाटों को आधुनिक कैमरों व ड्रोन की जद में लाया गया है।
कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ और एसपी धर्मराज मीना के मार्गदर्शन में जिला टास्क फोर्स, एसएएफ (SAF) और वन विभाग की टीमें मिलकर रात्रि गश्त को भी अंजाम दे रही हैं।
मध्य प्रदेश और राजस्थान मिलकर कर रहे मॉनिटरिंग
अवैध रेत परिवहन को रोकने के लिए अब अंतर-राज्यीय समन्वय भी स्थापित किया जा रहा है। मध्य प्रदेश की तर्ज पर राजस्थान के धौलपुर वन विभाग द्वारा भी सीमावर्ती इलाकों में एआई कैमरे लगाने की योजना पर काम चल रहा है।
दोनों राज्यों के विभागों द्वारा ड्रोन सर्विलांस, कैमरों के जरिए मॉनिटरिंग और रात्रि गश्त तेज किए जाने से चंबल के बीहड़ों और नदी मार्गों पर अवैध गतिविधियों पर लगाम कसने में काफी मदद मिल रही है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!