अचानक निरीक्षण करने पहुंचे थे जिला शिक्षा अधिकारी

मुरैना जिले के सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। बीते शनिवार को जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) बीएस इंदौलिया ने कैलारस विकासखंड के अंतर्गत आने वाले एक शासकीय प्राथमिक विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं की पोल खुल गई और भारी अनियमितताएं पाई गईं।

हेडमास्टर की जगह पढ़ा रही थी निजी शिक्षिका

जांच के दौरान स्कूल के प्रधानाध्यापक अमर लाल रावत अपनी ड्यूटी से गायब मिले। उनकी जगह एक निजी महिला शिक्षिका बच्चों को पढ़ाती हुई पाई गई। पूछताछ में खुलासा हुआ कि प्रधानाध्यापक द्वारा इस प्राइवेट टीचर को महज 4,500 रुपए महीने पर रखा गया था, जबकि खुद हेडमास्टर को बच्चों को पढ़ाने के एवज में हर महीने करीब 65 हजार रुपए वेतन मिलता है।

सामने आया कि अमर लाल रावत स्कूल में केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराने यानी हाजिरी लगाने आते थे और उसके बाद चले जाते थे। बच्चों की जिम्मेदारी पूरी तरह से उस निजी शिक्षिका पर छोड़ी हुई थी, जिसे वह अपने पास से वेतन देते थे।

स्कूल पर नहीं था कोई साइन बोर्ड

निरीक्षण के दौरान DEO को एक और बड़ी खामी देखने को मिली। विद्यालय के भवन पर किसी प्रकार का साइन बोर्ड नहीं लगाया गया था। हालात यह थे कि बाहर से देखने पर इस बात का अंदाजा लगाना भी असंभव था कि इस परिसर में कोई शासकीय प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहा है।

नोटिस जारी कर मांगा गया जवाब

जिला शिक्षा अधिकारी ने मौके की तमाम व्यवस्थाओं और अनियमितताओं का खुद वीडियो भी बनाया। इस गंभीर लापरवाही को संज्ञान में लेते हुए उन्होंने अनुपस्थित मिले प्रधानाध्यापक अमर लाल रावत को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

अधिकारियों के अनुसार, आरोपी हेडमास्टर को नोटिस का जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। यदि निर्धारित समयावधि के भीतर उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उनके विरुद्ध सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।