मुरैना जिले के पोरसा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ऊंदरपुरा किर्रायच गांव के रहने वाले मनोज कुमार शर्मा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ में इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्ति प्राप्त कर अपने पैतृक गृह नगर लौटे हैं। देश की सीमाओं की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर लंबी सेवाएं देने के बाद जब वे पोरसा पहुंचे, तो स्थानीय निवासियों, मित्रों और परिजनों ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।

बैंड-बाजे के साथ हुआ भव्य स्वागत

जैसे ही सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर मनोज शर्मा मुरैना से पोरसा की सीमा पर पहुंचे, वहां उनका स्वागत करने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इसके बाद उन्हें पारंपरिक गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों के बीच जुलूस के रूप में उनके पैतृक गांव तक लाया गया। इस पूरे सफर के दौरान रास्ते में विभिन्न स्थानों पर उनका स्वागत किया गया और पुष्पवर्षा के साथ फूल-मालाएं पहनाकर उनका सार्वजनिक अभिनंदन किया गया।

सिपाही के रूप में शुरू किया था करियर

मनोज कुमार शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत साल 1985 में सीआरपीएफ में एक आम सिपाही के तौर पर की थी। अपनी कार्यनिष्ठा और उत्कृष्ट सेवाओं के बूते वे लगातार तरक्की की सीढ़ियां चढ़ते रहे। वर्ष 1996 में वे नायक बने, इसके बाद 2002 में हवलदार, 2012 में सहायक उप निरीक्षक और 2014 में उप निरीक्षक के पद पर पहुंचे। अंततः साल 2023 में वे इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नत हुए और झारखंड में अपनी अंतिम सेवाएं पूरी करने के बाद रिटायर हुए।

उन्होंने कुल 41 साल और 8 महीने तक देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की मजबूती के लिए कार्य किया।

नक्सल विरोधी अभियानों में रहे शामिल

अपने लंबे सेवाकाल के अनुभवों को याद करते हुए मनोज शर्मा ने बताया कि देश की सेवा करने का जज्बा उनके भीतर बचपन से ही था। बल में रहते हुए उन्हें कई बार नक्सल विरोधी ऑपरेशनों और आतंकवादियों के खात्मे के लिए चलाए गए अभियानों में सीधे तौर पर हिस्सा लेने का अवसर मिला।

देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत रखना ही सीआरपीएफ का मुख्य ध्येय है। आज वर्दी उतारकर अपने एक परिवार से दूसरे परिवार के बीच आया हूं और अब आगे का समय अपने पिता और परिजनों के साथ व्यतीत करूंगा।

युवाओं को दी अनुशासन और मेहनत की सलाह

देश के रक्षा बलों में जाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए उन्होंने संदेश दिया कि सेना या अर्धसैनिक बलों में जाने के लिए शैक्षणिक योग्यताओं के साथ-साथ कड़ी शारीरिक मेहनत भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे रोज कम से कम 10 किलोमीटर दौड़ लगाएं तथा अपने खान-पान और सेहत पर पूरा ध्यान दें।

इसके साथ ही उन्होंने मौजूदा दौर के युवाओं में नशे की बढ़ती लत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बुरी संगत और नशे से हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए, क्योंकि केवल सच्ची मेहनत के बल पर ही मुकाम हासिल किया जा सकता है।