अक्सर यह देखा जाता है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद युवा शहरों में कॉर्पोरेट नौकरियों की तलाश में जुट जाते हैं, लेकिन मुरैना जिले के अंबाह क्षेत्र के रहने वाले 29 वर्षीय देवेंद्र कुशवाह ने इससे बिल्कुल अलग रास्ता चुना। कंप्यूटर साइंस में बीएससी की डिग्री लेने के बाद उन्होंने किसी कंपनी में नौकरी करने के बजाय अपने पैतृक खेती के कार्य को ही आधुनिक तरीके से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
पारंपरिक खेती को दिया आधुनिक स्वरूप
वर्ष 2017 में पिता के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी देवेंद्र के कंधों पर आ गई थी। उनके पिता भी सब्जी की खेती करते थे, लेकिन उस समय परंपरागत तरीकों का इस्तेमाल होता था जिसमें लागत अधिक और मुनाफा कम मिलता था। स्थिति को समझते हुए देवेंद्र ने खेती के पुराने तौर-तरीकों को बदलने की ठानी और वैज्ञानिक तकनीकों का सहारा लिया।
उन्होंने अपनी खेतों में ड्रिप सिंचाई प्रणाली, मल्चिंग शीट और मचान यानी ट्रेलिस तकनीक का उपयोग शुरू किया। इन आधुनिक पद्धतियों को अपनाने से खेतों में पानी की भारी बचत हुई, खरपतवार पर लगाम लगी और कीटनाशकों के छिड़काव का खर्च भी काफी कम हो गया। मचान विधि की वजह से टमाटर के पौधे जमीन से ऊपर रहे, जिससे फल सड़ने से बच गए और बाजार में उनकी गुणवत्ता उत्कृष्ट बनी रही।
महज दो बीघा में टमाटर की बंपर कमाई
अपनी इस नई कार्यशैली का असर उन्होंने जल्द ही अपनी फसल में देखा। पिछले साल देवेंद्र ने मात्र दो बीघा जमीन पर टमाटर की खेती की थी। इस पूरी फसल को तैयार करने में लगभग डेढ़ लाख रुपये की लागत आई, लेकिन फसल के तैयार होने के बाद महज चार महीने के भीतर उन्हें छह लाख रुपये की शानदार आय प्राप्त हुई। उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि यदि खेती में विज्ञान और तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाए, तो यह घाटे का सौदा नहीं बल्कि बहुत बड़ा मुनाफा दे सकती है।
देवेंद्र बताते हैं कि वर्ष 2014-15 के दौरान जब वे आईटीआई की पढ़ाई के सिलसिले में धार जिले में थे, तब उन्होंने वहां के किसानों को आधुनिक तकनीक से टमाटर की बंपर पैदावार लेते देखा था। वे किसान अपनी उपज को देश के साथ-साथ विदेशों तक भेज रहे थे। धार के इस अनुभव ने ही उनकी पूरी सोच बदल दी और उन्होंने मन बना लिया कि वे नौकरी के पीछे भागने के बजाय तकनीकी खेती को ही अपना मुख्य व्यवसाय बनाएंगे।
बाजार की मांग और रणनीति से मिली सफलता
खेती में सफलता के मूल मंत्र पर चर्चा करते हुए देवेंद्र का कहना है कि किसानों को हमेशा लीक से हटकर सोचना चाहिए। वे हमेशा ऐसी योजना बनाते हैं कि उनकी फसल बाजार में तब आए जब उसकी आवक कम हो और दाम ऊंचे मिलें। इसी सोची-समझी रणनीति के बल पर उन्हें हमेशा अपनी उपज के बेहतरीन दाम मिलते हैं।
आज वे आसपास के किसानों के लिए एक बड़े रोल मॉडल बन चुके हैं। उनका मानना है कि किसी के अधीन रहकर नौकरी करने से बेहतर है कि व्यक्ति अपनी खुद की जमीन पर मालिक बनकर काम करे। यदि खेती को सही योजना, बाजार की मांग की समझ और आधुनिक तकनीक के साथ किया जाए, तो यह किसी भी अन्य पेशे से ज्यादा सम्मान और आमदनी दिला सकती है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!