ग्वालियर-चंबल आंचल में जलीय जीवों के संरक्षण को लेकर एक अहम प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के 'प्रोजेक्ट डॉल्फिन' के अंतर्गत भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) देहरादून की टीम ने चंबल नदी में अपना दूसरा राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण सफलतापर्वूक संपन्न कर लिया है।
242 किलोमीटर के दायरे में हुआ सर्वे
भारतीय वन्यजीव संस्थान की 18 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने 7 अक्टूबर से 14 अक्टूबर के बीच चंबल अभयारण्य के बरबासिन घाट से लेकर पचनदा तक के क्षेत्र में यह अभियान चलाया। इस दौरान टीम ने कुल 242 किलोमीटर लंबे जलीय दायरे को कवर करते हुए डॉल्फिन के प्राकृतिक आवास और उनकी मौजूदगी का बारीकी से अध्ययन किया।
नंबर बढ़ने के कयास और अंतिम घोषणा
सर्वेक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने संभावना जताई है कि इस बार चंबल नदी में डॉल्फिन की संख्या में लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इस बड़े राष्ट्रव्यापी सर्वे के अंतिम और आधिकारिक आंकड़ों का ऐलान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र किया जाना तय किया गया है।
आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का इस्तेमाल
गंगा, सिंधु और अन्य मुहाना डॉल्फिनों की वास्तविक आबादी तथा उनके रहवास की स्थिति का सटीक वैज्ञानिक आकलन करने के लिए इस बार अत्याधुनिक उपकरणों की मदद ली गई। सर्वे के दौरान एफ-पोड्स (F-PODs) और ए-टैग्स (A-TAGs) के जरिए पानी के अंदर की ध्वनियों को रिकॉर्ड किया गया।
इसके अतिरिक्त, प्रत्यक्ष अवलोकन प्रणाली, जल गुणवत्ता की जांच के लिए वाईएसआई प्रो डीएसएस (YSI Pro DSS), ई-डीएनए सैंपल संकलन तथा नदी की गहराई व उसकी भौगोलिक संरचना का पता लगाने के लिए चार्ट प्लॉटर और डेप्थ साउंडर का भी भरपूर उपयोग किया गया।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!