मुरैना जिले के सबलगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष सोनेराम धाकड़ के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर कोई फैसला न लिए जाने के मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच में मध्य प्रदेश शासन के नगरीय प्रशासन मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना का प्रकरण विचाराधीन है। यह विवाद पिछले दस महीनों से लगातार खिंचता जा रहा है।

पार्षदों ने उठाया था अविश्वास का कदम

गत वर्ष 17 दिसंबर 2025 को नगर पालिका के कुल 18 में से 17 पार्षदों ने एकजुट होकर जिला कलेक्टर के समक्ष अध्यक्ष को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। शासन स्तर पर काफी समय तक कोई कार्रवाई न होने पर पार्षदों ने सिंगल बेंच का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने शासन को आठ सप्ताह के भीतर इस पर निर्णय लेने के सख्त निर्देश दिए थे, लेकिन तय समय सीमा में पालन न होने के बाद पार्षदों को पुनः अदालत की शरण लेनी पड़ी।

कोर्ट में तामील को लेकर हुई बहस

हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान शासन तथा नगर पालिका अध्यक्ष के अधिवक्ताओं ने पूर्व तिथि के अवमानना नोटिस को चुनौती दी। उनका पक्ष था कि सिंगल बेंच के आदेश की प्रति प्रमुख सचिव को आधिकारिक रूप से तामील नहीं करवाई गई थी। हालांकि, पार्षदों के वकील ने सुनवाई के दौरान आदेश की तामील की कॉपी डबल बेंच के समक्ष प्रस्तुत कर दी। अब इस मामले में अगली तारीख पर प्रमुख सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई को लेकर अदालत अपना आदेश सुनाएगी।

विकास कार्यों पर लग गया है ग्रहण

इस गतिरोध के कारण सबलगढ़ नगर पालिका का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। विवाद के चलते बीते दस महीनों से नगर पालिका परिषद और एमआईसी की एक भी बैठक आयोजित नहीं हो पाई है, जिससे शहर के कई महत्वपूर्ण और बुनियादी विकास कार्य बीच में ही लटक गए हैं।

इस संबंध में पार्षद रचना अशरफ खान और कैलाश चंद गुप्ता का कहना है कि 18 में से 17 पार्षदों का खुला विरोध होने के बावजूद शासन स्तर पर निर्णय में हो रही देरी से स्थानीय नागरिकों को परेशानी हो रही है और शहर का विकास रुक गया है।

वहीं, सीएमओ सौरभ जैतवार का कहना है कि उन्हें पद संभाले हुए आठ महीने बीत चुके हैं और इस अवधि में परिषद की बैठक नहीं हो सकी है। फिलहाल अध्यक्ष और सीएमओ के निर्धारित प्रशासनिक अधिकारों के जरिए ही कामकाज चलाया जा रहा है, लेकिन वे जल्द ही पार्षदों से संवाद स्थापित कर बैठक बुलाने के प्रयास करेंगे।