मुरैना नगर निगम सीमा में शामिल किए गए ग्राम डोमपुरा में बुनियादी सुविधाओं का अभाव अब भी बना हुआ है। निगम का हिस्सा बने करीब दस साल बीत जाने के बाद भी यहां ग्रामीणों के लिए पक्के मुक्तिधाम का निर्माण नहीं हो सका है।

खुले में अंतिम संस्कार करने की मजबूरी

हाल ही में वार्ड क्रमांक 44 के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र में 6 अक्टूबर को 77 वर्षीय गोकुल कर्ण का निधन हो गया था। मुक्तिधाम की सुविधा न होने के कारण परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों को मजबूरन खुले आसमान के नीचे ही उनका अंतिम संस्कार करना पड़ा।

दस महीने पहले हो चुकी है जमीन आवंटित

ग्रामीणों ने जानकारी दी कि ग्राम डोमपुरा के सर्वे क्रमांक 69 में से 0.910 हेक्टेयर भूमि मुक्तिधाम के लिए तय की गई है। कलेक्टर न्यायालय द्वारा 10 दिसंबर 2025 को आदेश जारी कर यह जमीन नगर पालिक निगम मुरैना के नाम आवंटित की गई थी, लेकिन कागजी प्रक्रिया पूरी होने के दस महीने बाद भी धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ है।

जनसुनवाई से लेकर अधिकारियों तक गुहार

स्थानीय रहवासियों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर कलेक्टर, तहसीलदार, पटवारी, सांसद, महापौर और निगम आयुक्त तक को कई बार लिखित और मौखिक शिकायत दे चुके हैं। गत 25 अगस्त 2026 को जनसुनवाई में भी इसके खिलाफ कंप्यूटर कोड के जरिए शिकायत दर्ज कराई गई थी, किंतु हर बार केवल कोरे आश्वासन ही मिले।

ग्रामीणों ने बताया कि जब डोमपुरा स्वतंत्र ग्राम पंचायत था, तब अंतिम संस्कार की बेहतर व्यवस्था थी। लेकिन नगर निगम का हिस्सा बनने के बाद सुविधाएं सुधरने की बजाय और बदतर हो गई हैं। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए महापौर शारदा सोलंकी ने कहा कि उन्हें इस समस्या की जानकारी नहीं थी और अब वार्ड में टीम भेजकर वस्तुस्थिति की जांच कराई जाएगी तथा जल्द मुक्तिधाम का निर्माण शुरू करवाया जाएगा।