दुनियाभर में शिरडी वाले साईं बाबा के अनगिनत भक्तों के घरों और मंदिरों में उनकी एक खास तस्वीर बेहद लोकप्रिय है। इस तस्वीर में बाबा दीवार से पीठ टिकाकर खड़े नजर आते हैं, उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान है और उन्होंने एक हाथ से अपना कुर्ता पकड़ा हुआ है। बहुत कम लोगों को यह जानकारी है कि साईं बाबा की इस अति दुर्लभ और प्रसिद्ध तस्वीर का सीधा संबंध मध्य प्रदेश के ग्वालियर से जुड़ा हुआ है।
सिंधिया स्टेट के फोटोग्राफर थे केएच मावल
यह ऐतिहासिक तस्वीर ग्वालियर के ही एक प्रतिभावान फोटोग्राफर ने खींची थी। केएच मावल उस समय सिंधिया स्टेट के आधिकारिक राजसी फोटोग्राफर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने ग्वालियर में ही फोटोग्राफी के क्षेत्र में कदम रखा था और बाद में 'केएच मावल एंड संस' के नाम से अपनी फोटोग्राफी फर्म स्थापित की थी, जिसने उस दौर में काफी नाम कमाया।
महाराजा माधवराव सिंधिया प्रथम का मिला था आदेश
अगस्त 1916 के दौरान ग्वालियर रियासत के तत्कालीन महाराजा माधवराव सिंधिया प्रथम ने केएच मावल को अपने राजमहल में तलब किया। महाराजा ने उन्हें शिरडी जाने और वहां साईं बाबा की तस्वीर खींचकर लाने का विशेष निर्देश दिया। शासक का आदेश मिलते ही मावल अपना भारी-भरकम कैमरा और फोटोग्राफी का पूरा साजो-सामान लेकर शिरडी के लिए रवाना हो गए।
हालांकि, शिरडी पहुंचने के बाद मावल के लिए साईं बाबा की तस्वीर लेना बिल्कुल भी आसान नहीं साबित हुआ। उन दिनों साईं बाबा का स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था और वे बहुत ही कम अपने कक्ष से बाहर आते थे। इस कठिन परिस्थिति के चलते ग्वालियर के इस फोटोग्राफर को बाबा की एक झलक पाने और उनकी तस्वीर लेने के वास्ते शिरडी में पूरे दो महीने तक का लंबा इंतजार करना पड़ गया।
सेवकों की मदद से बनी बात और मिला मौका
लंबे इंतजार के बाद भी जब कोई सीधा रास्ता नहीं सूझा, तो मावल ने साईं बाबा के निजी सेवकों से संपर्क किया। उन्होंने बाबा के करीबियों से बातचीत कर तस्वीर लेने में सहयोग मांगा। सेवकों ने मावल को आश्वस्त किया कि जब भी बाबा बाहर आएंगे, वे फोटोग्राफर को उस तय रास्ते की जानकारी दे देंगे ताकि वे अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें।
केएच मावल के पौत्र लारेब द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एक रोज मावल को सूचना मिली कि साईं बाबा एक निश्चित मार्ग से गुजरने वाले हैं। यह बात सुनते ही उन्होंने बिना वक्त गंवाए अपना कैमरा बिल्कुल तैयार रखा। जब बाबा उस मार्ग से निकले तो बीमारी और कमजोरी के कारण वे थोड़ी देर के लिए एक दीवार से टिककर खड़े हो गए। ठीक उसी ऐतिहासिक पल में केएच मावल ने वह दुर्लभ तस्वीर अपने कैमरे में सदा के लिए कैद कर ली।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!