ग्वालियर के ऐतिहासिक धरोहरों को पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से उभारने के लिए चल रहे विकास कार्यों में सुस्ती देखी जा रही है। शहर के प्रसिद्ध फूलबाग क्षेत्र को एक नए और आकर्षक स्वरूप में ढालने का काम इन दिनों धीमी गति से आगे बढ़ रहा है, जिससे तय समयसीमा पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
स्वदेश दर्शन योजना के तहत हो रहा है कायाकल्प
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही 'स्वदेश दर्शन योजना 2.0' के अंतर्गत फूलबाग को एक विशेष हेरिटेज एक्सपीरियंस जोन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 16.73 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा रही है, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र की ऐतिहासिक भव्यता को पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाना है.
इस योजना के दायरे में शहर के कई प्रमुख और ऐतिहासिक स्थल शामिल किए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से बैजाताल, मोतीमहल, गोपाल मंदिर, नगर निगम संग्रहालय और अमर शहीद रानी लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सौंदर्यीकरण और विकास कार्य किए जाने हैं।
तय समयसीमा बीतने के बाद भी कार्य अधूरा
योजना के तहत निर्माण और सौंदर्यीकरण का जिम्मा संभालने वाली ठेका कंपनी निर्धारित डेडलाइन यानी मार्च के महीने तक इस कार्य को पूरा करने में असफल रही है। पिछले करीब दो महीनों से मैदानी स्तर पर काम की रफ्तार बेहद सुस्त बनी हुई है, जिससे प्रोजेक्ट में देरी होती जा रही है।
काम की धीमी गति को देखते हुए अब इस परियोजना की समयसीमा को आगे बढ़ा दिया गया है। हालांकि, स्थानीय पर्यटन प्रेमियों और जानकारों का मानना है कि यदि यह कार्य समय पर पूरा हो जाता, तो शहर के पर्यटन व्यवसाय को इसका सीधा लाभ मिल सकता था।
पर्यटकों के लिए मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
इस पूरी परियोजना के तहत आने वाले दिनों में पर्यटकों के मनोरंजन और सुविधा के लिए कई खास इंतजाम किए जाने हैं। इनमें मुख्य रूप से ई-विंटेज कार का संचालन, क्षेत्र में लाइट एंड साउंड शो का आयोजन और खान-पान के लिए एक आकर्षक फूड जोन विकसित किया जाना शामिल है, जिससे पर्यटकों को एक ही जगह पर बेहतर अनुभव मिल सके।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!