महाराजबाड़े से कंपू तक सड़क पर चलना बना चुनौती

ग्वालियर शहर के व्यस्ततम और ऐतिहासिक महाराज बाड़े से कंपू की तरफ जाने वाली सड़क पिछले पांच वर्षों से बदहाली का शिकार है। स्मार्ट सिटी के तहत करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के दावे के बावजूद इस मार्ग की हालत सुधरने का नाम नहीं ले रही है। मार्ग पर बने बड़े-बड़े गड्ढे, बिखरे पत्थर और कीचड़ से आम जनता का गुजरना दूभर हो गया है।

दुकानदारों और राहगीरों का दर्द: धंधा मंदा, हादसे का डर

इस मार्ग पर रोजाना मजदूरी और ठेला लगाने वाले नवल बाथम ने बताया कि सड़क की खस्ता हालत के कारण उनका व्यापार चौपट हो गया है। शाम को दुकान या ठेला लगाने से पहले उन्हें खुद गड्ढों से गंदा पानी निकालना पड़ता है। कीचड़ और दुर्घटनाओं के भय से ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुंचते, जिससे परिवार का गुजर-बसर करना भी कठिन हो गया है।

क्षेत्र के व्यापारी अतुल सोनी का कहना है कि यह सड़क अब हादसों का केंद्र बन चुकी है। रोजाना कई लोग यहां फिसलकर या गड्ढों की वजह से चोटिल हो रहे हैं। बुजुर्गों और महिलाओं का इस रास्ते से पैदल निकलना भी जोखिम भरा साबित हो रहा है। नगर निगम के अधिकारियों से कई बार गुहार लगाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

न्यायालय की सख्ती और विभागों से जवाब तलब

सड़कों की इस बदतर हालत और निर्माण कार्यों में बरती गई लापरवाही पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि कागजी दावों से काम नहीं चलेगा और धरातल पर वास्तविकता की जांच की जाएगी।

इस मामले की अगली सुनवाई आगामी गुरुवार को तय की गई है। न्यायालय ने संबंधित विभागों को पिछले पांच वर्षों में हुए खर्च का पूरा ब्योरा और निर्माण कार्यों की मूल मेजरमेंट बुक्स (एमबी) अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों में खलबली मच गई है।