ग्वालियर जिले के स्वास्थ्य विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों का गुस्सा आखिरकार शनिवार को फूट पड़ा। पिछले आधे साल से एक भी रुपया वेतन न मिलने के कारण इन कर्मियों के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कई परिवारों के सामने दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल साबित हो रहा है।

विभाग और एजेंसी के बीच पिस रहे कर्मचारी

कर्मचारियों का कहना है कि जब वे अपनी इस समस्या को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के पास पहुंचते हैं, तो बजट न होने का हवाला दिया जाता है। वहीं, दूसरी ओर आउटसोर्स एजेंसी उन्हें स्वास्थ्य विभाग के चक्कर काटने की सलाह देती है। इस तरह पीड़ित कर्मचारी विभाग और एजेंसी के बीच फंसकर बुरी तरह प्रताड़ित हो रहे हैं और उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।

वेतन न मिलने के कारण स्थानीय दुकानदारों ने अब उन्हें राशन उधार देना भी बंद कर दिया है। इसके अलावा मकान मालिकों द्वारा लगातार किराए के लिए दबाव बनाया जा रहा है और फीस जमा न होने के कारण बच्चों को स्कूलों से निकाले जाने की चेतावनी भी मिल रही है। बकाया वेतन मांगने पर कई कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी दिए जाने का भी गंभीर आरोप है।

मांग पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन

इन तमाम समस्याओं से तंग आकर शनिवार को स्वास्थ्य श्रमिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अशोक गोस्वामी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कर्मचारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय परिसर पहुंचे और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक उनके खातों में छह महीने का पूरा बकाया वेतन नहीं पहुंच जाता, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन थमने वाला नहीं है।

स्वास्थ्य सेवाएं ठप करने की चेतावनी

धरने पर बैठे कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने शीघ्र ही इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे ग्वालियर जिले की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को ठप करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। इस स्थिति में जो भी हालात पैदा होंगे, उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।