शहर में रामदास घाटी से लेकर शिंदे की छावनी और नौगजा रोड तक बनने वाले 2.6 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर का स्थानीय स्तर पर विरोध अब मुखर हो गया है। इसी कड़ी में गुरुवार को बड़ी संख्या में रहवासी, व्यापारी और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग सड़कों पर उतरे और परियोजना के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए रैली निकाली।
डेढ़ सौ मकानों और दुकानों पर मंडरा रहा बेघर होने का खतरा
प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि इस फ्लाईओवर के निर्माण से करीब 150 मकान इसकी चपेट में आ सकते हैं। इसके अलावा सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई के दायरे में भी लगभग 250 मकान आने की आशंका जताई जा रही है। विरोध जताने के लिए पूरे क्षेत्र में ‘फ्लाईओवर मंजूर नहीं’ और ‘जनहित में फ्लाईओवर का विरोध’ लिखे बैनर और फ्लेक्स चस्पा किए गए हैं।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि वे बीते करीब डेढ़ साल से इस योजना का विरोध कर रहे हैं, लेकिन उनकी आपत्तियों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरी योजना पर पुनर्विचार किया जाए, कोई दूसरा वैकल्पिक रास्ता निकाला जाए और जिन परिवारों पर उजड़ने का खतरा है, उनके पुनर्वास की पुख्ता व्यवस्था की जाए।
दिव्यांग दुकानदार ने लगाई गुहार, आजीविका छिनने का डर
इस प्रस्तावित निर्माण से प्रभावित होने वाले दिव्यांग दुकानदार प्रेमचंद्र उमरैया की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से अपनी दुकान बचाने की गुहार लगाई है। प्रेमचंद्र पैरों से दिव्यांग हैं और उनके माता-पिता भी नहीं हैं।
उनकी तीन मीटर की छोटी सी दुकान ही उनके भरण-पोषण का एकमात्र जरिया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत तमाम स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि उनकी बेसहारा स्थिति को देखते हुए दुकान को बचाने का कोई रास्ता निकाला जाए, अन्यथा उनके सामने गंभीर आजीविका संकट पैदा हो जाएगा।
वैकल्पिक मार्ग के इस्तेमाल की उठी मांग
व्यापारी बृजेश शर्मा ने बताया कि उन्हें इस फ्लाईओवर के बारे में सबसे पहले अखबारों के माध्यम से पता चला था, जिसके बाद से ही रहवासियों ने विरोध जताना शुरू कर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2011 में भी उन्हें ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 2020 में कोरोना महामारी ने कारोबार की कमर तोड़ दी और अब 2026 में सिर पर मंडरा रहे इस संकट ने लोगों की नींद उड़ा दी है।
वहीं आंदोलन से जुड़े राजकुमार ने सुझाव दिया कि इलाके में रेलवे लाइन का एक पुराना मार्ग है जिस पर अब रेलगाड़ियों का संचालन बंद है। प्रशासन को उस पुराने मार्ग को वैकल्पिक रास्ते के रूप में आजमाने पर विचार करना चाहिए ताकि मुख्य सड़क का दबाव भी घटे। उन्होंने साफ किया कि जनता विकास के खिलाफ नहीं है, मगर उजाड़ने से पहले बसाने की सही व्यवस्था होनी चाहिए।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!