ग्वालियर नगर निगम का विशेष सम्मेलन सोमवार को शहर के विकास कार्यों और बुनियादी समस्याओं पर चर्चा की बजाय भारी सियासी हंगामे का गवाह बना। बैठक के दौरान जलभराव और बदहाल सड़कों की स्थिति को लेकर पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा और सदन का माहौल गर्मा गया।

एजेंडा फाड़कर जताया विरोध, तीन बार स्थगित हुई कार्यवाही

बैठक के दौरान विरोध का सिलसिला तब शुरू हुआ जब पार्षद बृजेश श्रीवास और आशा चौहान ने निगम की कार्यप्रणाली से नाराज होकर बैठक का एजेंडा फाड़ दिया। इसके बाद अन्य भाजपा पार्षदों ने भी सभापति की आसंदी को घेर लिया और जमकर नारेबाजी की। सदन में मचे इस बवाल के कारण अधिकारियों और पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और बिगड़ते हालात को देखते हुए कार्यवाही को तीन बार रोकना पड़ा।

प्रदर्शन कर रहे पार्षदों का कड़ा आरोप था कि निगम की बैठकों में केवल खोखले निर्देश दिए जाते हैं, जिनका मैदानी स्तर पर कोई असर नजर नहीं आता। शहर के कई हिस्से जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं और मुख्य मार्ग गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। पार्षदों ने चेतावनी दी कि यदि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो वे सदन में ही बोरी-बिस्तर के साथ धरने पर बैठ जाएंगे।

महापौर का पलटवार और छह महीने से अटके दो बिंदु

इस पूरे घटनाक्रम पर महापौर डॉ. शोभा सिंह सिकरवार ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पार्षद सदन की कार्यवाही को सुनियोजित तरीके से बाधित करने का काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, निर्धारित एजेंडे पर सार्थक चर्चा करने के बजाय बेवजह के मुद्दे उछाले जाते हैं और प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है।

बता दें कि इस विशेष सम्मेलन का एजेंडा पिछले छह महीनों से विवादों के घेरे में है। इस संबंध में पहली बैठक इसी साल 2 फरवरी को आहूत की गई थी, जिसमें कुल 10 बिंदुओं को शामिल किया गया था। इनमें से 8 बिंदुओं पर तो चर्चा पूरी हो चुकी है, लेकिन शेष दो महत्वपूर्ण बिंदु अब भी विवाद का कारण बने हुए हैं और महीनों बीत जाने के बाद भी इनका कोई समाधान नहीं निकल सका है।