हाई कोर्ट के आदेश पर खुली पोल

ग्वालियर में सड़कों की गुणवत्ता को लेकर चल रही जांच के दौरान बड़ा घपला सामने आया है। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद जब शहर के मार्गों की जमीनी हकीकत परखने के लिए खुदाई की गई, तो आधिकारिक रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिला।

रिकॉर्ड में दर्ज थी गिट्टी, जमीन पर मिला मलबा

मामला बेटी बचाओ मार्ग का है, जहां सड़क की मजबूत नींव तैयार करने के लिए गिट्टी की परत डाली जानी थी। कागजी अनुमान के मुताबिक यह परत 1125 घनमीटर होनी चाहिए थी, जबकि माप पुस्तिका यानी मेजरमेंट बुक में इसे बढ़ाकर 1440.31 घनमीटर दर्ज किया गया और इसी आधार पर पूरा भुगतान भी कर दिया गया।

जांच आयोग ने जब स्थानीय निवासी शुभम शर्मा के घर के सामने मुआयना किया, तो रिकॉर्ड में दर्ज गिट्टी की वह परत मौके से पूरी तरह नदारद मिली। यह वही खास स्थान था जिसका जिक्र बीते 17 अगस्त को अदालत में सैंपलिंग प्रक्रिया के दौरान सामने आया था।

निगम की लीपापोती और आयोग की कार्रवाई

इस खुलासे से पहले नगर निगम ने मामले में लीपापोती करते हुए डामर की परत को हटाकर वहां मिट्टी डाल दी थी और उस हिस्से को समतल कर दिया था। हालांकि, इसके दो दिन बाद जब जांच आयोग ने उसी स्थान पर दोबारा खुदाई करवाई, तो गिट्टी के बजाय केवल भवन निर्माण का बेकार मलबा ही नीचे से निकला।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कुल सात अलग-अलग स्थानों पर सैंपल लिए गए, जिनकी जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। स्थानीय स्तर पर इस खुलासे के बाद निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।