ग्वालियर अंचल में बदहाल और टूटी-फूट सड़कों की समस्या को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्‍य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मंगलवार को कड़ा रुख अख्तियार किया। अदालत ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई और सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर तीखे सवाल खड़े किए।

सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने कंसेशनायर को किए जाने वाले 26 करोड़ 53 लाख रुपए के एन्युइटी भुगतान पर रोक लगाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने यह भी आदेशित किया कि इस रोकी गई राशि को बैंक में सावधि जमा यानी एफडीआर के रूप में सुरक्षित रखा जाए। अदालत के समक्ष पेश की गई एनएचएआई की अपनी नेटवर्क सर्वे व्हीकल रिपोर्ट में ही सड़कों की स्थिति तय मानकों के विपरीत पाई गई थी।

इस स्थिति पर कड़ा असंतोष व्यक्त करते हुए खंडपीठ ने टिप्पणी की कि केवल कागजी रिपोर्टों के भरोसे क्षेत्र की जनता को खराब एवं खतरनाक सड़कों के सहारे नहीं छोड़ा जा सकता।

नगर निगम के पैचवर्क और शराब दुकानों पर भी नजर

न्यायालय ने इस मामले में दो अन्य प्रमुख बिंदुओं पर भी कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि नगर निगम द्वारा शहर में करोड़ों रुपए खर्च करके जो पैचवर्क कराए गए हैं, उनकी भी स्वतंत्र जांच कराई जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुसार हुआ है या नहीं।

इसके अतिरिक्त, हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे संचालित हो रही शराब की दुकानों की दूरी को लेकर भी राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि आखिर शहरी और ग्रामीण इलाकों के लिए शराब दुकानों की दूरी तय करने को लेकर अलग-अलग प्रावधान क्यों रखे गए हैं।

अब आगामी 16 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

राज्य शासन को शराब दुकानों के नियमों से जुड़े तमाम पहलुओं पर एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब अदालत में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई आगामी 16 अक्टूबर को निर्धारित की गई है, जिस पर स्थानीय नागरिकों और प्रशासन की निगाहें टिकी हुई हैं।