फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और जाली वेतन विवरण के बल पर एक ऑटोमोबाइल कंपनी में उच्च पद और भारी वेतन ऐंठने वाले पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ग्वालियर क्राइम ब्रांच की टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम देते हुए आरोपी को उत्तर प्रदेश के कानपुर से पकड़ा है।

वेतन निपटान के दौरान सामने आया फर्जीवाड़ा

पुलिस से प्राप्त विवरण के अनुसार 43 वर्षीय देवेंद्र कुमार दुबे, निवासी कानपुर को अगस्त 2025 में श्रीतुलजा भवानी ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड (आनंद टोयोटा) में ग्रुप उपाध्यक्ष के रूप में रखा गया था। बाद में उसकी कथित कार्य कुशलता को देखते हुए उसे ग्रुप सीईओ (आफ्टर सेल्स) की जिम्मेदारी दे दी गई थी। आरोपी ने मई 2026 में अचानक इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद जब कंपनी प्रबंधन ने उसका अंतिम वित्तीय निपटान शुरू किया तब दस्तावेजों की गहराई से जांच में इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

दिखाया था ढाई लाख से अधिक का मासिक वेतन

पड़ताल में यह बात सामने आई कि देवेंद्र ने नौकरी पाने के लिए लैंडमार्क ग्रुप का एक फर्जी अनुभव पत्र प्रस्तुत किया था। बड़ी सैलरी का पैकेज पाने के उद्देश्य से उसने लैंडमार्क ग्रुप के नाम से दो लाख अस्सी हजार रुपये से अधिक का जाली बैंक स्टेटमेंट भी तैयार किया और उस पर खुद के हस्ताक्षर कर कंपनी में जमा करवा दिया था।

हालांकि, बाद की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उसने कभी भी लैंडमार्क ग्रुप में काम नहीं किया था। इस खुलासे के बाद मानव संसाधन प्रबंधक ने प्रबंधन को सूचित किया और ग्वालियर क्राइम ब्रांच थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। अगस्त 2026 में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी थी।

कानपुर में छिपा था आरोपी, पुलिस ने दबोचा

अपराध दर्ज होने के बाद से ही आरोपी लगातार पुलिस की पकड़ से बचने के लिए छिपता फिर रहा था। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि वह उत्तर प्रदेश के कानपुर में अपने एक ठिकाने पर छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच की एक विशेष टीम ने कानपुर में दबिश दी और आरोपी को धर दबोचा।

क्राइम ब्रांच थाना प्रभारी अमित शर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी ने जाली बैंक स्टेटमेंट और अनुभव प्रमाण पत्र के जरिए कंपनी के साथ धोखाधड़ी की थी। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।