ग्वालियर के अटल द्वार के पास साडा रोड स्थित पुरानी नैरोगेज रेलवे लाइन के नजदीक बसाई गई ब्लू लोटस कॉलोनी को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। इस मामले में अब प्रशासन ने स्वयं हाईकोर्ट के समक्ष यह स्वीकार कर लिया है कि सरकारी भूमि पर बिल्डर द्वारा सड़क का निर्माण और बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी गई है।
टीएनसीपी और प्रशासन की जांच में हुआ खुलासा
विभाग की ओर से अदालत में स्पष्ट किया गया है कि जिन सर्वे नंबरों पर अतिक्रमण होने की बात सामने आ रही है, उनके लिए विभाग द्वारा कभी कोई विकास अनुमति जारी नहीं की गई थी। दूसरे शब्दों में, जिस जमीन को प्रशासन सरकारी मान रहा है, असलियत में वहां कॉलोनाइज़र द्वारा अवैध रूप से रोड और बाउंड्रीवाल बना दी गई है, साथ ही पौधे भी रोपे गए हैं।
याचिकाकर्ता ने लगाए थे गंभीर आरोप
इस पूरे मामले की शुरुआत याचिकाकर्ता चंद्रेश त्यागी द्वारा दायर की गई थी। उनका आरोप था कि ब्लू लोटस कॉलोनी का विकास करते समय सुनियोजित तरीके से सरकारी जमीन को भी इस निजी कॉलोनी के दायरे में शामिल कर लिया गया, जिसके बाद मामले की कानूनी लड़ाई शुरू हुई।
शिकायत में पुरानी छावनी इलाके के 9 अलग-अलग सर्वे नंबरों की करीब 1.212 हेक्टेयर सरकारी जमीन होने का दावा किया गया था। इस पूरी जमीन की बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 25 करोड़ रुपए आंकी गई है, जिसे लेकर न्यायालय में सुनवाई चल रही है।
सीमांकन प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई
इससे पहले 15 जून को हाईकोर्ट ने इस विवादित भूमि का सीमांकन कराने के निर्देश जारी किए थे। इसके बाद 14 जुलाई को नगर निगम ने राजस्व अमले को इस कार्य के लिए पत्र लिखा था। हालांकि बीच में निगम ने अदालत को आदेश पालन की बात कही थी, लेकिन रिकॉर्ड में यह भी दर्ज था कि राजस्व अधिकारियों द्वारा वास्तविक सीमांकन किया जाना अभी बाकी है।
अब प्रशासन के इस नए रुख के बाद शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों को प्रथमदृष्टया मजबूत आधार मिल गया है। प्रशासन की इस स्वीकारोक्ति के बाद अब ब्लू लोटस कॉलोनी से अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!