समाप्त हो चुका है पुरानी एजेंसी का कार्यकाल
ग्वालियर शहर के इंटेलीजेंस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम यानी आईटीएमएस का संचालन पिछले पांच साल से संभाल रही निजी कंपनी का अनुबंध गत 12 अगस्त को ही पूरा हो चुका है। ग्वालियर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन द्वारा अभी तक पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल के तहत नया ठेका फाइनल नहीं किया जा सका है, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इंदौर मॉडल अपनाने के फेर में लटका नया टेंडर
स्मार्ट सिटी प्रशासन ने समय रहते पुराने सिस्टम के आधार पर ही टेंडर की प्रक्रिया 12 अगस्त से पहले शुरू कर दी थी। इस दौरान अधिकारियों ने इंदौर की तर्ज पर पीपीपी मॉडल पर टेंडर देने का मन बनाया, जिसके चलते पहले निकाले गए टेंडर को रद्द कर दिया गया। नए पीपीपी मॉडल के टेंडर पर स्मार्ट सिटी के कार्यकारी निदेशक स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाना है, और इसी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण अब तक नया अनुबंध नहीं हो पाया है।
शहर के इन प्रमुख चौराहों पर लगे हैं ट्रैफिक सिग्नल
शहर में यातायात को नियंत्रित करने के लिए हजीरा चौराहा, पड़ाव चौराहा, रानी लक्ष्मीबाई तिराहा, फूलबाग चौराहा, चेतकपुरी चौराहा, नाका चंद्रवदनी चौराहा, अलापुर तिराहा, न्यू कलेक्ट्रेट तिराहा, गोविंदपुरी चौराहा और राजमाता चौराहा पर सिस्टम स्थापित हैं। इसके अलावा माधव नगर चौराहा, जीआर मेडिकल चौराहा, तानसेन रेसीडेंसी तिराहा, आकाशवाणी चौराहा, परशुराम तिराहा, मेला ग्राउंड मृगनयनी गार्डन, गोले का मंदिर चौराहा, ब्रिगेडियर तिराहा, पिंटोपार्क तिराहा, कालपी ब्रिज पुल तिराहा, डीडी नगर तिराहा, सिरोल तिराहा, जेसी मिल तिराहा और मलगढ़ा चौराहा पर भी यही व्यवस्था लागू है।
कंट्रोल कमांड सेंटर से होती है निगरानी और चालान कार्रवाई
इन प्रमुख स्थानों के साथ ही शहर में 13 जगहों पर स्पीड रडार भी लगाए गए हैं ताकि तेज रफ्तार वाहनों पर नजर रखी जा सके। मोतीमहल स्थित कंट्रोल कमांड सेंटर में मुख्य कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से पूरे शहर के यातायात की निगरानी की जाती है और यहीं से वाहनों के चालान काटे जाने के साथ शुल्क जमा करने की प्रक्रिया भी संचालित होती है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!