केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सोमवार शाम रेल मार्ग के जरिए ग्वालियर पहुंचे। रेलवे स्टेशन पर उनके आगमन पर बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। स्थानीय प्रवास के दौरान उनका यह दौरा धार्मिक और पारंपरिक कार्यक्रमों के चलते चर्चा में रहा।
देवघर में पारंपरिक उर्स में हुए शामिल
ग्वालियर पहुंचने के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री सिंधिया गोरखी स्थित देवघर पहुंचे। यहां वे बाबा मंसूर अली शाह के सालाना उर्स में शामिल हुए। सिंधिया परिवार के मुखिया के रूप में उन्होंने पूरी परंपरा और विधि-विधान के साथ बाबा की पूजा-अर्चना की और करीब एक घंटे तक देवघर में समय बिताया।
तीन सदियों पुरानी है यह अनूठी परंपरा
सिंधिया परिवार के करीबी बाल खांडे के अनुसार, बाबा मंसूर अली शाह के सालाना उर्स में सिंधिया परिवार के मुखिया के शामिल होने की यह परंपरा लगभग 300 साल पुरानी है। इस आयोजन की विशेषता यह है कि बाबा की पूजा हिंदू और मुस्लिम दोनों पद्धतियों के अनुसार संपन्न की जाती है। बाबा मंसूर अली शाह को सिंधिया परिवार का मार्गदर्शक और कुलगुरु भी माना जाता है, जिसके चलते परिवार के मुखिया हर साल यहां हाजिरी लगाते हैं।
फूलों से तैयार होता है शिवलिंग और पगड़ी की रस्म
इस उर्स की खास रस्म के तहत देवघर में बाबा के सम्मान में सबसे पहले चादर बिछाई जाती है। इसके सामने लगभग चार से पांच फीट की ऊंचाई पर फूलों से एक भव्य शिवलिंग तैयार किया जाता है। इसके पश्चात सिंधिया परिवार की ओर से उस शिवलिंग को सम्मान के साथ पगड़ी पहनाई जाती है, जिसके बाद परिवार के मुखिया उनके समक्ष बैठकर ध्यान और आराधना करते हैं।
इस पूरी परंपरा में आराधना की अवधि पहले से निश्चित नहीं होती है। यह तब तक जारी रहती है जब तक शिवलिंग से एक पुष्प अपने आप नीचे चादर पर नहीं गिर जाता। इस पुष्प के गिरने को बाबा द्वारा पूजा स्वीकार करने और आशीर्वाद मिलने का प्रतीक माना जाता है। इस बार भी करीब एक घंटे की आराधना के बाद पुष्प चादर पर गिरा, जिसके बाद पूजा संपन्न हुई और केंद्रीय मंत्री वहां से रवाना हुए।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!