ग्वालियर जिले में देवास के एक मामले में सेवा समाप्ति और प्रदेश के अन्य हिस्सों में चल रही निलंबन की दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ पटवारियों ने मोर्चा खोल दिया है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिले के लगभग 300 पटवारी कलेक्ट्रेट परिसर स्थित आजीविका दीदी कैफे के बाहर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं।

कलेक्टर द्वारा निलंबन के बाद भड़का आक्रोश

हाल ही में जिला कलेक्टर रुचिका चौहान ने कार्य में कथित लापरवाही बरतने के आरोप में 19 पटवारियों को निलंबित करने के आदेश दिए थे। इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से मैदानी अमले में विरोध के सुर तेज हो गए हैं और पटवारी संघ ने खुलकर असंतोष जताना शुरू कर दिया है।

मुख्य विवाद ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026’ के तहत पटवारियों को ‘निष्पादक’ (Executant) बनाए जाने को लेकर है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह नई जिम्मेदारी उनके मूल कार्यक्षेत्र और अधिकारों से बाहर है, जिससे उन पर अनावश्यक दबाव बन रहा है।

स्वामित्व योजना और डिजिटल हस्ताक्षर पर सवाल

धरने पर बैठे पटवारी लखन लाल सोनी ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में स्वामित्व योजना की शुरुआत की थी। इसके अंतर्गत ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों का ड्रोन सर्वे कराकर नक्शे और अधिकार अभिलेख तैयार किए गए थे, जो पहले ही जारी हो चुके हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर ग्रामीण खसरों के जरिए अपनी संपत्ति का लेनदेन और बैंकों से लोन ले सकते हैं।

विरोध का केंद्रबिंदु 17 सितंबर से लागू हुई वह नई व्यवस्था है, जिसके तहत पटवारियों को निष्पादक बनाते हुए उनकी व्यक्तिगत यूजर आईडी का उपयोग किया जा रहा है।

पंजीयन अधिनियम और कानूनी अधिकार का तर्क

पटवारियों का स्पष्ट तर्क है कि पंजीयन अधिनियम, 1908 के अनुसार संपत्ति के हस्तांतरण और पंजीयन की कानूनी प्रक्रिया तय होती है। चूंकि पटवारी भूमि के वास्तविक स्वामी नहीं होते, इसलिए उन्हें निष्पादक की भूमिका में खड़ा करना नियम विरुद्ध है। उनका मानना है कि रजिस्ट्री से जुड़े कार्य पंजीयन विभाग के अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

धरना प्रदर्शन में शामिल महिला पटवारियों ने बताया कि उन्होंने किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की है और इस संबंध में वे कलेक्टर के सामने भी अपना पक्ष रख चुकी हैं। इस मामले को लेकर प्रांतीय स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों और शासन स्तर के मंत्रियों से भी बातचीत जारी है।

मांगें पूरी होने तक ऑनलाइन कार्यों से दूरी

मध्यप्रदेश पटवारी संघ के पत्र क्रमांक 426/पट०संघ०/2026 के आह्वान पर शुरू हुए इस आंदोलन के तहत ग्वालियर के पटवारियों ने दो टूक कह दिया है। जब तक उन्हें निष्पादक की भूमिका से पूरी तरह मुक्त नहीं किया जाता और निलंबित किए गए साथियों के आदेश वापस नहीं लिए जाते, तब तक वे प्रांतीय निर्देशों के तहत ऑनलाइन राजस्व कार्यों से दूर रहकर विरोध दर्ज कराते रहेंगे।