ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय परिसर में चल रही दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का रविवार को समापन हो गया। 'न्यायिक शिक्षा के क्षितिज का विस्तार' विषय पर आधारित इस आयोजन के दूसरे दिन यानी 27 सितंबर को विभिन्न सत्रों में विमर्श हुआ।

न्यायिक शिक्षा का डिजिटल रूपांतरण और चुनौतियां

सम्मेलन के पहले सत्र में 'न्यायिक शिक्षा का डिजिटल रूपांतरण: अवसर, चुनौतियां और आगे का रास्ता' विषय पर चर्चा की गई। इस दौरान कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस सूरज गोविंद राज और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव सुधाकर कालगांवकर ने अपने विचार साझा किए।

वक्ताओं ने रेखांकित किया कि किस प्रकार आधुनिक डिजिटल तकनीक न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बना रही है। साथ ही, इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए न्यायिक अधिकारियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

संवेदनशील और समावेशी न्याय प्रणाली पर बल

दूसरे सत्र का मुख्य विषय 'संवेदनशील और समावेशी न्याय के लिए न्यायिक सक्षमताओं का निर्माण' रखा गया था। इस सत्र में गुजरात हाईकोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सोनिया गोकानी और उड़ीसा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुभाशीष तालपत्रा ने महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।

उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग तक पूरी तरह से निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से न्याय सुलभ कराने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला, जिससे आमजन को न्याय मिलने में आसानी हो सके।

जस्टिस अहलूवालिया ने जताया आभार और बीएसएफ डॉग शो रहा आकर्षण

कार्यक्रम के समापन अवसर पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायाधिपति जी.एस. अहलूवालिया ने दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस के सभी सत्रों के प्रमुख बिंदुओं का सार प्रस्तुत किया। उन्होंने ज्ञानार्जन के मुख्य पहलुओं को रेखांकित करते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस दो दिवसीय आयोजन के अंतिम चरण में कृषि विश्वविद्यालय परिसर में बीएसएफ टेकनपुर स्थित राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र द्वारा एक विशेष डॉग शो का भी आयोजन किया गया। इस दौरान प्रशिक्षित श्वानों द्वारा दिखाए गए शानदार करतबों ने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया।