अंचल में कमजोर वर्ग के लोगों को उनकी जमीनों से बेदखल करने और रसूखदारों द्वारा अवैध कब्जे किए जाने के मामलों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रशासन पर रसूखदारों के समर्थन का आरोप
सुनवाई के दौरान अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी तंत्र बाहुबल और राजनीतिक रसूख रखने वाले लोगों का परोक्ष रूप से समर्थन कर रहा है। गरीबों को उनकी पट्टे की जमीन पर सुरक्षा दिलाने में प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हुआ है, जिससे पीड़ितों में निराशा बढ़ रही है।
यह पूरा मामला अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम तथा मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 170-बी के तहत दलितों की जमीन हड़पे जाने और उन्हें न्याय दिलाने से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने पाया कि जमीनों की धोखाधड़ी के मामलों में पुलिस प्रभावी कार्रवाई करने से बचती रही है।
कार्रवाई के आंकड़ों में बड़ी गड़बड़ी
अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि 133 मामलों में जमीन वापसी के दावे सामने आने के बावजूद पुलिस ने महज 14 एफआईआर दर्ज कीं। हैरानी की बात यह है कि एक ही एफआईआर में 96-96 आरोपियों के मामलों को सामूहिक रूप से जोड़ दिया गया, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
सुनवाई के दौरान गुना की पुलिस अधीक्षक हितिका वसल से आवेदन के कुछ खास पैराग्राफ में दर्ज बयानों की सत्यता को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन कई बार पूछने पर भी उनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
पुलिस और ओआईसी के बीच आपसी खींचतान
मामले में नया मोड़ तब आया जब एसपी ने यह दलील दी कि संबंधित आवेदन पुलिस विभाग को भरोसे में लिए बिना ओआईसी यानी प्रभारी सहायक श्रम आयुक्त आशीष कुमार तिवारी के कहने पर लगाया गया था। वहीं सरकारी वकील ने भी माना कि उन्होंने ओआईसी को ऐसा करने से मना किया था।
अदालत ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सहायक श्रम आयुक्त एवं ओआईसी आशीष कुमार तिवारी को तलब किया है और उनसे इस पूरे घटनाक्रम पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कोर्ट यह स्पष्ट करना चाहता है कि आखिर किसके निर्देश पर और किन उद्देश्यों के तहत ऐसे बयान दर्ज कराए गए।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!