विशेष सम्मेलन के दौरान हुआ गतिरोध

ग्वालियर नगर निगम परिषद के हालिया विशेष सम्मेलन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच एक बार फिर खींचतान सामने आई है। बैठक के दौरान चर्चा के बीच ही माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब निगम आयुक्त संघ प्रिय और पार्षदों के बीच कार्यप्रणाली को लेकर तीखी बहस छिड़ गई।

आयुक्त की सफाई और कार्यशैली पर सवाल

सदन से अचानक जाने के मामले में सफाई देते हुए आयुक्त संघ प्रिय ने स्पष्ट किया कि उन्हें उच्च न्यायालय से एक जरूरी बुलावा आया था, जिसके कारण उन्हें सदन की कार्यवाही बीच में छोड़कर जाना पड़ा था। उन्होंने सदन के किसी भी प्रकार के अपमान से इंकार किया।

इसके साथ ही उन्होंने कुछ पार्षदों के काम कराने के तरीकों पर सवाल खड़े किए। आयुक्त का कहना था कि कई बार अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है और जब प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की बात होती है, तो कुछ जनप्रतिनिधि उस कार्रवाई को रुकवाने के लिए पहुंच जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ पार्षद नियमों के विपरीत अपनी पसंद के कार्य करवाना चाहते हैं।

भाजपा पार्षद मोहित जाट का पलटवार

आयुक्त के इन बयानों के बाद बैठक में मौजूद भाजपा पार्षद मोहित जाट ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। पार्षद ने स्पष्ट किया कि वे जिस मामले में कार्रवाई रोकने पहुंचे थे, वह प्रशासनिक दृष्टिकोण से उचित नहीं था और उनके वहां जाने के पीछे कोई निजी स्वार्थ नहीं था। उन्होंने आयुक्त के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि केवल अपने वार्ड की जनता की समस्याओं को उठाने और उनके समाधान के लिए अधिकारियों के समक्ष बात रखते हैं।

सत्र का समापन और सभापति की प्रतिक्रिया

इस गर्मागर्म बहस के बीच सभापति मनोज सिंह तोमर ने स्थिति को संभालते हुए किसी बड़े विवाद की संभावना से इंकार किया। उन्होंने बताया कि बैठक का निर्धारित एजेंडा पूरी तरह से पूरा कर लिया गया था। शहर के विकास कार्यों और स्थानीय समस्याओं पर चर्चा के लिए बुलाया गया यह विशेष सम्मेलन अंततः अधिकारियों और पार्षदों के आपसी मतभेदों के साये में संपन्न हुआ।