ग्वालियर शहर में वाहन चालकों को अपनी गाड़ियों में ईंधन डलवाने के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं के लिए भी भारी संघर्ष करना पड़ रहा है। शहर के विभिन्न हिस्सों में संचालित पेट्रोल पंपों पर हवा भरवाने, पीने के शुद्ध पानी और साफ-सुथरे शौचालयों की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है।
शहर में हैं दो सौ से अधिक पेट्रोल पंप
जिले में हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, जियो और नायरा कंपनियों के दो सौ से अधिक पेट्रोल पंप संचालित हैं। इनमें से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने वर्ष 2021 से 2024 के बीच 37 नए पंप भी खोले हैं, लेकिन इसके बावजूद उपभोक्ताओं को मिलने वाली सुविधाओं में कोई सुधार देखने को नहीं मिला है।
तेल कंपनियों की गाइडलाइंस का उल्लंघन
विभिन्न तेल कंपनियों के क्षेत्रीय अधिकारियों और कार्यालयों को पेट्रोल पंपों का नियमित निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस (एमडीजी) के प्रावधानों के तहत हवा, टेलीफोन, प्राथमिक उपचार और पेयजल जैसी सुविधाएं अनिवार्य हैं। शौचालय गंदा पाए जाने, पानी न मिलने या ग्राहकों को उनका उपयोग न करने देने पर कार्रवाई का नियम है, लेकिन मैदानी स्तर पर इनका पालन नहीं हो रहा है।
हाल यह है कि तेल कंपनियों के अधिकारी खुद मौके पर जाकर जांच करने के बजाय पंप संचालकों से ही फोटो मंगवाकर औपचारिकता पूरी कर लेते हैं। यही वजह है कि पंपों पर सुविधाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह गई हैं।
लश्कर क्षेत्र में दो प्रमुख पंप बंद होने से बढ़ी मुश्किलें
स्थानीय स्तर पर लश्कर क्षेत्र के दो प्रमुख पेट्रोल पंप बंद होने से भी वाहन चालकों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। इनमें से शिंदे की छावनी स्थित पेट्रोल पंप एक अग्निकांड के बाद से बंद है, जबकि सनातन धर्म मंदिर के पास स्थित पेट्रोल पंप आपसी विवाद के चलते बंद चल रहा है। इन दोनों महत्वपूर्ण पंपों के बंद रहने से वाहन चालकों को ईंधन और अन्य जरूरतों के लिए लंबा चक्कर काटकर दूसरे स्थानों पर जाना पड़ रहा है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!