ग्वालियर राजकीय रेलवे पुलिस यानी जीआरपी ने मानव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक किराए के मकान पर छापा मारकर म्यांमार की चार विदेशी युवतियों को सुरक्षित बाहर निकाला है, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं।
स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस से हुई थी मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी
इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ जब भोपाल कंट्रोल रूम से जीआरपी ग्वालियर को सूचना मिली कि ट्रेन संख्या 12643 स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस के सामान्य डिब्बे में एक संदिग्ध युवक सफर कर रहा है। थाना प्रभारी इंस्पेक्टर दीपशिखा सिंह तोमर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने ट्रेन की घेराबंदी कर म्यांमार निवासी मुबीन को धर दबोचा। पूछताछ के दौरान मुबीन ही इस तस्करी का मुख्य सूत्रधार निकला।
अलीगढ़ के ठिकाने पर मारा गया छापा
ट्रेन में पकड़े गए मुबीन से मिली जानकारी के आधार पर जीआरपी की एक विशेष टीम उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ पहुँची। वहाँ बताए गए किराए के मकान पर दबिश देकर पुलिस ने मुबीन के साथी मोहम्मद हसन को दबोच लिया और उसके कब्जे से चारों युवतियों को बरामद कर लिया। ये सभी लड़कियां म्यांमार की मूल निवासी हैं और वर्तमान में इन्हें अलीगढ़ में छुपा कर रखा गया था।
दुर्गम रास्तों से देश में हुई थी घुसपैठ
प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इन युवतियों को बांग्लादेश के कुतुपालोंग शरणार्थी शिविर से भारत लाया गया था। तस्कर इन्हें जंगल, नदी और पहाड़ों जैसे बेहद कठिन और गुप्त रास्तों से होते हुए देश की सीमा के भीतर लेकर आए। शुरुआती बयानों में यह भी सामने आया है कि इन युवतियों को उनके परिजनों की कथित सहमति के बाद ही यहाँ लाया गया था।
जम्मू और श्रीनगर में होनी थी शादियाँ
जांच में खुलासा हुआ है कि तस्कर इन चारों युवतियों को शादी कराने के उद्देश्य से जम्मू और श्रीनगर ले जाने की जुगत में थे। पुलिस अब इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि इस अवैध नेटवर्क के तार देश में कहाँ-कहाँ फैले हैं और आगे इन्हें किन लोगों को सौंपा जाना था। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!