ग्वालियर नगर निगम मुख्यालय में बुधवार को राजस्व विभाग के कामकाज की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। निगम आयुक्त संघ प्रिय की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का मुख्य एजेंडा शहर में टैक्स वसूली की रफ्तार को तेज करना और आय के नए स्रोत तलाशना था।

टैक्स कलेक्शन में सुस्ती पर फूटा गुस्सा

समीक्षा के दौरान जब वित्तीय आंकड़ों पर चर्चा हुई, तो कर संग्रहक जसवंत कुशवाहा द्वारा की जा रही वसूली बेहद कम पाई गई। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए निगमायुक्त ने संबंधित कर संग्रहक समेत तीन कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

बैठक में जानकारी दी गई कि नगर निगम को इस बार अब तक कुल 4 करोड़ 70 लाख रुपए का राजस्व मिल चुका है, जो पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले ज्यादा है। हालांकि, व्यावसायिक संपत्तियों के किराये के मोर्चे पर स्थिति कमजोर रही है।

किराये की वसूली और लीज नवीनीकरण में देरी पर कार्रवाई

नोडल अधिकारी अनूप लिटोरिया ने बताया कि निगम की दुकानों, पीढ़ियों और चबूतरों के किराये के मद में पहली तिमाही के दौरान केवल 1 करोड़ 18 लाख रुपए की आय हुई है। पिछले साल इसी अवधि में इसी मद से लगभग 5 करोड़ रुपए की आमदनी हुई थी। इस भारी गिरावट को देखते हुए आयुक्त ने अधिकारियों को तुरंत रिकवरी बढ़ाने के कड़े निर्देश दिए।

इसके अलावा, संपत्तियों के लीज नवीनीकरण के मामलों में अनावश्यक देरी और पेंडेंसी पर भी निगम प्रशासन का डंडा चला है। इस कार्य में लापरवाही बरतने के लिए लिपिक ललित खटके को भी कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश दिए गए।

खाली संपत्तियों का उपयोग और पार्किंग व्यवस्था की समीक्षा

निगम की खाली पड़ी संपत्तियों के कमर्शियल इस्तेमाल को लेकर भी बैठक में मंथन किया गया। आयुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को इन संपत्तियों का पूरा ब्योरा जुटाकर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है, जिससे उनके बेहतर सदुपयोग की रूपरेखा तैयार की जा सके।

शहर की यातायात व्यवस्था और पार्किंग को सुधारने के लिए वर्तमान स्थिति का जायजा लिया गया। अधिकारियों ने बताया कि निगम द्वारा चिन्हित कुल 31 पार्किंग स्थलों में से फिलहाल 7 ठेके पर संचालित हैं जबकि 8 का संचालन खुद निगम कर रहा है। आयुक्त ने निर्देश दिए कि जो पार्किंग स्थल उपयोग में नहीं हैं, उन्हें डिनोटिफाई किया जाए और जिन नए इलाकों में पार्किंग की जरूरत है, वहां के लिए प्रस्ताव बनाकर जल्द प्रस्तुत किया जाए।

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में एमआईसी सदस्य प्रेमलता धर्मेंद्र जैन, अपर आयुक्त प्रदीप सिंह तोमर, उपायुक्त सुनील चौहान सहित निगम के अन्य प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे।