अदालत की चेतावनी के बाद भी नहीं पहुंचे अफसर

ग्वालियर में एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को समय पर उसका वित्तीय भुगतान न मिलना जल संसाधन विभाग के बड़े अधिकारियों को भारी पड़ गया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की चेतावनी के बावजूद विभाग के तीन प्रमुख अधिकारी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए।

खास बात यह रही कि सुनवाई के दौरान इन अधिकारियों की तरफ से ना तो अदालत में पेशी से छूट का कोई आवेदन दिया गया और ना ही उपस्थिति के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई। इस ढिलाई को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने अब तीनों अफसरों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए हैं।

जस्टिस अमित सेठ की अदालत में हुई सुनवाई

यह पूरा मामला जस्टिस अमित सेठ की अदालत में चल रही सेवानिवृत्त टाइमकीपर कामता सिंह गुर्जर की अवमानना याचिका से जुड़ा हुआ है। शुक्रवार को हुई इस सुनवाई में याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अरुण कटारे ने पक्ष रखा, जबकि अधिकारियों की पैरवी के लिए अधिवक्ता विशन कुशवाह कोर्ट में मौजूद रहे।

मामले के तथ्यों के अनुसार, उच्च न्यायालय ने नवंबर 2023 में ही कामता सिंह गुर्जर को समान वेतनमान और उसके सभी एरियर का भुगतान दो महीने के भीतर करने के सख्त निर्देश दिए थे।

अगस्त में दिया था चार हफ्ते का भरोसा

लंबी प्रक्रिया के बाद अगस्त 2026 में विभाग की ओर से अदालत को भरोसा दिलाया गया था कि चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता का पूरा भुगतान कर दिया जाएगा। इस कड़ी में बीते 16 सितंबर को भुगतान की प्रशासनिक स्वीकृति भी जारी हो चुकी थी।

इसके बावजूद याचिकाकर्ता के खाते में तयशुदा रकम नहीं पहुंची, जिसके बाद अदालत ने इस अवमानना मामले में अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के यह कड़े निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 27 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।