ग्वालियर में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने और आबोहवा दुरुस्त करने के लिए किए जा रहे सरकारी प्रयासों की पोल केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ताजा रैंकिंग ने खोल दी है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस के अवसर पर सोमवार को स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025-26 के परिणाम घोषित किए गए, जिनमें शहर की स्थिति निराशाजनक रही है।
दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में पिछड़ा ग्वालियर
दस लाख से अधिक आबादी वाले देश के 48 प्रमुख शहरों की इस प्रतिस्पर्धा में ग्वालियर को 157 अंकों के साथ 30वां स्थान मिला है। इस सूची में देश के अन्य शहर काफी आगे रहे हैं, जिनमें लखनऊ पहले स्थान पर, इंदौर दूसरे, जबलपुर तीसरे और भोपाल चौथे पायदान पर काबिज रहा है। पिछले सर्वेक्षण में ग्वालियर 28वें स्थान पर था, जो अब दो पायदान लुढ़ककर नीचे आ गया है। हालांकि, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के बेस ईयर 2020-21 के मुकाबले औसत पीएम-10 के स्तर में 13.97 प्रतिशत की मामूली कमी दर्ज की गई है, जो 136 से घटकर 117 पर आ पहुंचा है।
इन मोर्चों पर गंवाने पड़े अंक
समीक्षा के दौरान विभागों द्वारा प्रस्तुत स्व-मूल्यांकन में 200 में से 187 अंक दर्शाए गए थे, लेकिन केंद्रीय मूल्यांकन के बाद वास्तविक स्कोर घटकर 157 रह गया। नगर निगम सीमा के दस किलोमीटर के दायरे में संचालित पारंपरिक ईंट-भट्टों को आधुनिक तकनीक पर शिफ्ट न किए जाने के कारण इस श्रेणी में शून्य अंक मिला है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों के मुकाबले पर्याप्त सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन तैयार न होना, प्रति एक लाख आबादी पर छह प्रदूषण जांच केंद्रों के मानक के विरुद्ध कम और सक्रिय पीयूसी सेंटर होना तथा पेट्रोल पंपों की शत-प्रतिशत की बजाय केवल साठ प्रतिशत जांच होना मुख्य वजहें रहीं जिनसे स्कोर प्रभावित हुआ।
कचरा प्रबंधन और धूल नियंत्रण में मिला लाभ
भले ही कई मानकों पर शहर पिछड़ गया हो, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन भी दर्ज किया गया है। घर-घर कचरा संग्रहण, कचरा प्रोसेसिंग, लीगेसी वेस्ट का निपटान और प्लास्टिक कचरा संग्रहण के मामलों में बेहतर अंक मिले हैं। सड़क की धूल पर नियंत्रण के लिए रोड शोल्डर पेवमेंट, कच्ची सड़कों के डामरीकरण, ग्रीनबेल्ट विकास और मैकेनिकल स्वीपिंग जैसे कार्यों को सराहा गया है। साथ ही, औद्योगिक क्षेत्रों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम और उद्योगों को स्वच्छ ईंधन अपनाने की प्रक्रिया में भी प्रगति देखी गई है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह परिणाम उनके लिए एक सीख की तरह है और कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। परिवहन विभाग ने शहर में पीयूसी सेंटरों की संख्या बढ़ाने की बात कही है, जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य विभागों के स्तर पर भी व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है ताकि आगामी समय में आबोहवा को और बेहतर बनाया जा सके।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!