ग्वालियर खंडपीठ ने एक गुमशुदा युवती और युवक की तलाश के मामले में पुलिस की जांच पर असंतोष व्यक्त करते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायालय ने जांच का नेतृत्व कर रहे विशेष जांच दल (SIT) प्रमुख और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) सुजावल जग्गा को तत्काल प्रभाव से इस प्रकरण की जांच से हटा दिया है।
अब इस पूरे मामले की पड़ताल ग्वालियर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) स्वयं करेंगे और इसकी व्यक्तिगत रूप से निगरानी भी करेंगे। यह आदेश सोमवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने दिया।
पुलिस की कार्यशैली पर हाईकोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस एक ऐसे पिता पर बार-बार अपनी गुमशुदा बेटी का पता बताने का दबाव बना रही है, जिसे खुद अपनी बेटी के ठिकाने की कोई जानकारी नहीं है। न्यायालय ने इसे पुलिस की अनुचित कार्यशैली करार देते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश पुलिस की जांच प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी पुलिस की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि अब इस मामले में प्रस्तुत की जाने वाली प्रत्येक स्थिति रिपोर्ट (स्टेटस रिपोर्ट) वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के शपथ पत्र के साथ ही दाखिल की जाएगी। न्यायालय ने यह उम्मीद भी जताई कि पुलिस केवल तकनीकी संसाधनों पर निर्भर रहने के बजाय जमीनी स्तर पर भी सक्रियता से लापता लोगों की तलाश करेगी।
जांच में देरी और पुलिस की लापरवाही
सुनवाई के दौरान, सरकारी वकील ने बताया कि आधार कार्ड की लोकेशन से संबंधित जानकारी के लिए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) को एक ईमेल भेजा गया था, लेकिन कोई जवाब न मिलने के कारण जांच आगे नहीं बढ़ सकी। इस पर न्यायालय ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस दो महीने तक सिर्फ एक ईमेल के भरोसे बैठी रही और संबंधित कार्यालय जाकर सीधे जानकारी जुटाने का प्रयास तक नहीं किया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस की जांच केवल मोबाइल लोकेशन तक ही सीमित रही। यदि मोबाइल बंद हो जाता है, तो पूरी जांच रुक जाती है। इस प्रकार की जांच पद्धति से गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाना अत्यंत कठिन है।
सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजावल जग्गा ने स्वीकार किया कि उन्हें पूरे मामले को समझने में लगभग दो महीने का समय लग गया। उन्होंने न्यायालय से जांच जारी रखने के लिए एक और अवसर देने का अनुरोध किया, लेकिन उच्च न्यायालय ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि सरकार बेटियों की सुरक्षा की बात करती है, लेकिन इस मामले में पुलिस की कार्रवाई बेहद धीमी और निराशाजनक रही है।
इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। तब तक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की व्यक्तिगत निगरानी में जांच आगे बढ़ेगी और उसकी प्रगति रिपोर्ट उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!