मध्यप्रदेश के ग्वालियर में बिलौआ और रफादपुर क्षेत्र की खदानों में हो रहे अवैध खनन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। शुक्रवार को हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए 83 खदानों से संबंधित रिकॉर्ड तलब किया है। इनमें से 57 खदानें वर्तमान में संचालित हैं, जिन पर अब कानूनी संकट मंडराने लगा है।
लीज कहीं, खनन कहीं और: हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एक खदान की लीज रिन्युअल फाइल की जांच की। इस जांच में पाया गया कि फाइल में न तो खदान की मैपिंग का कोई रिकॉर्ड था और न ही उसके सीमांकन का कोई उल्लेख था। इससे यह स्पष्ट हुआ कि खदानों को आवंटित पट्टे कहीं और के थे, जबकि खनन कहीं और किया जा रहा था। इस गंभीर अनियमितता पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि भोपाल मुख्यालय में लंबित फाइलों को भी अगली सुनवाई पर अदालत में पेश किया जाए। याचिकाकर्ता वकील अकरम खान द्वारा दायर एक याचिका पर यह महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।
16 खदानों पर रोक, संचालकों को नोटिस जारी
इससे पहले, हाईकोर्ट के आदेश पर खनिज विभाग ने 16 खदानों का रिकॉर्ड पेश किया था। इस रिकॉर्ड में कई चौंकाने वाली खामियां और संदिग्ध दस्तावेज सामने आए थे। बिना मैपिंग और नियमों के उल्लंघन के चल रहे इन कार्यों को देखते हुए, हाईकोर्ट ने इन 16 खदानों के संचालकों को सीधे मामले में पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया है और उनसे इस अनियमितता पर जवाब मांगा है।
9 साल से अटकी फाइलों पर प्रशासनिक सुस्ती
सुनवाई के दौरान प्रशासनिक सुस्ती और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का एक और मामला सामने आया। जब इन खदान संचालकों पर करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाया गया था, तो उन्होंने राजस्व न्यायालय में अपील की थी। ग्वालियर से ये मामले 9 साल पहले डबरा एसडीएम कोर्ट में स्थानांतरित किए गए थे। हैरानी की बात यह है कि डबरा एसडीएम कोर्ट ने इन 9 सालों में न तो मामलों की सुनवाई की और न ही जुर्माने की वसूली पर कोई अंतिम निर्णय लिया।
कोर्ट की सख्ती के बाद, शासन स्तर पर भी हलचल मच गई है। डबरा एसडीएम रुपेश सिंघई का तबादला कर दिया गया है और जूही गर्ग को नई एसडीएम नियुक्त किया गया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में नई एसडीएम सभी आवश्यक रिकॉर्ड के साथ कोर्ट पहुंचीं।
इसके अतिरिक्त, बिलौआ क्षेत्र में पत्थरों के अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग वाहनों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए लगाए गए ई-चेकगेट के फुटेज भी कोर्ट के आदेश पर जब्त किए गए हैं। इन फुटेज से अवैध परिवहन के वास्तविक आंकड़ों का पता लगाने में मदद मिलेगी।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!