ग्वालियर शहर के प्रसिद्ध फूलबाग मैदान में इस वर्ष भी विजयदशमी का पावन पर्व बेहद उत्साह और उमंग के माहौल में मनाया गया। बुराई पर अच्छाई की विजय के इस पावन पर्व पर शहरवासियों में खासा उत्साह देखने को मिला, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मैदान में एकत्रित हुए।

विशालकाय पुतलों का हुआ दहन

आयोजन के मुख्य आकर्षण के तौर पर फूलबाग मैदान में 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। इसके साथ ही लंकापति के भाई कुंभकरण और पुत्र मेघनाथ के 55-55 फीट ऊंचे पुतले भी बनाए गए थे, जिन्हें अग्नि के हवाले किया गया।

शाम ढलते ही मैदान में स्थानीय नागरिकों का आना शुरू हो गया था, जिससे कुछ ही समय में पूरा परिसर खचाखच भर गया। पुतले जलने के दौरान आसमान में हुई जोरदार और रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने इस पारंपरिक उत्सव की रौनक को और अधिक बढ़ा दिया, जिसका आनंद बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने लिया।

श्रीराम-लक्ष्मण की आरती और शुभकामनाओं का दौर

पुतला दहन से पहले और बाद की धार्मिक रस्मों के तहत भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की आरती उतारी गई। इस अनुष्ठान में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

धर्म और नैतिकता की जीत का संदेश देने वाले इस पर्व पर उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर विजयादशमी की बधाइयां दीं और पर्व की खुशियां साझा कीं।

सुरक्षा और दमकल के पुख्ता इंतजाम

मैदान में जुटी भारी जनसमूह को नियंत्रित करने और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। आपात स्थिति से निपटने के लिए दमकल गाड़ियों की तैनाती भी सुनिश्चित की गई थी।

पुतले जलने की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद, दमकल कर्मियों ने पानी के तेज बौछारों का उपयोग कर अवशेष आग को पूरी तरह से बुझाया, ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।