कैग की ऑडिट रिपोर्ट में जीवाजी विवि की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
ग्वालियर के प्रतिष्ठित जीवाजी विश्वविद्यालय (जेयू) के दूरस्थ शिक्षण संस्थान में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। हाल ही में सामने आई कैग (भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक) की मार्च 2024 की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, इस संस्थान में शैक्षणिक गतिविधियों और परीक्षाओं के संचालन में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं।
सैकड़ों विद्यार्थियों के अटके इम्तिहान और प्रमोशन
संस्थान की स्थापना वर्ष 1995 में दूरदराज के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। यहां बीए और बीकॉम जैसे स्नातक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ एम.लिब, एमए (ड्राइंग-पेंटिंग, इतिहास, भूगोल) और एमकॉम जैसे स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। इन कोर्सों में वर्ष 2021 से 2024 के बीच कुल 597 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। ऑडिट जांच में यह बात सामने आई कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुरुआती वर्षों में प्रथम वर्ष की परीक्षाएं तो करा लीं, लेकिन स्नातक द्वितीय वर्ष और स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित ही नहीं की गईं।
स्थिति यह बन गई कि शैक्षणिक सत्र 2023-24 के यूजी और पीजी दोनों ही स्तर के पाठ्यक्रम के पेपर दिसंबर 2024 तक लंबित पड़े रहे। परीक्षा संपन्न न होने के कारण छात्र अगली कक्षाओं में पदोन्नत नहीं हो सके। हैरान करने वाली बात यह है कि विवि प्रबंधन के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि परीक्षाएं समय पर क्यों नहीं कराई गईं और ऑडिट टीम द्वारा पूछे जाने पर भी कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया।
महीनों की देरी से हुईं परीक्षाएं, रिकॉर्ड में नहीं स्पष्ट कारण
रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि जिन परीक्षाओं का आयोजन कराया गया, वे भी निर्धारित समय-सारणी से बहुत पीछे थीं। सत्र 2021-22 की परीक्षाएं तय समय से करीब 14 महीने की देरी के बाद मई और जून 2023 के दौरान ली गईं। इसी प्रकार, वर्ष 2022-23 की परीक्षाएं भी 10 महीने विलंब से जनवरी 2024 में संपन्न कराई गईं।
विश्वविद्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड में इस भारी विलंब का कोई भी प्रशासनिक या ठोस कारण दर्ज नहीं किया गया है। जानकारों का मानना है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि इस लचर व्यवस्था के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय न हो सके। फिलहाल इस खुलासे के बाद स्थानीय विद्यार्थियों और शैक्षणिक हलकों में विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली को लेकर नाराजगी बनी हुई है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!