ग्वालियर के सातऊ गांव स्थित प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर परिसर में हर साल अष्टमी और नवमी के अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु जुटते थे। इस दौरान यहां लगने वाले मेले में खिलौने, प्रसाद, झूले और दैनिक उपयोग के सामान की दुकानों पर अच्छी-खासी ग्राहकी होती थी, लेकिन इस बार वहां पूरी तरह वीरानगी छाई हुई है।
हादसे के साये में फीका पड़ा मेला, 80 प्रतिशत दुकानें बंद
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, हाल ही में हुए दर्दनाक ट्रक हादसे के बाद से मेले का करीब 50 लाख रुपए से ज्यादा का कारोबार प्रभावित हुआ है। हालात इस कदर बदतर हो गए हैं कि नवमी के पर्व से पहले ही लगभग 80 फीसदी दुकानें बंद हो चुकी हैं। दूसरे जिलों और अन्य राज्यों से आए दुकानदारों ने मायूस होकर अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है।
दुर्गा नवमी के दिन जब मेला ग्राउंड का जायजा लिया गया तो वहां सन्नाटा पसरा मिला। जिन रास्तों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें हुआ करती थीं, वहां अब केवल मायूस व्यापारी नजर आ रहे हैं। कई दुकानदारों के लिए तो अपनी दुकान तक सामान लाने में लगा ढुलाई का खर्च निकालना भी मुश्किल साबित हुआ है।
उम्मीद से बेहद कम पहुंचे श्रद्धालु
आम तौर पर अष्टमी और नवमी के मौके पर शीतला माता मंदिर में एक से डेढ़ लाख तक श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी उम्मीद के साथ छोटे और बड़े कारोबारी नौ दिनों के लिए अपनी दुकानें सजाते हैं, लेकिन इस बार हादसे के कारण लोगों ने मेले से दूरी बना ली। भारी वित्तीय नुकसान को देखते हुए दुकानदारों ने आखिरी दिनों तक रुकने के बजाय लौटने में ही भलाई समझी।
कोरोना महामारी के दौरान भी मेले में ऐसे हालात नहीं बने थे, जितने खराब हालात इस बार हादसे के बाद देखने को मिले हैं।
व्यापारियों का छलका दर्द, प्रशासन पर उठाए सवाल
छतरपुर से अपनी दुकान लेकर आईं दर्पण ने बताया कि वह पिछले पांच साल से यहां खिलौने बेच रही हैं, लेकिन इस बार ग्राहकी न होने से उन्हें गहरी निराशा हाथ लगी है। वहीं, दतिया से पहली बार आईं दामिनी का कारोबार भी चौपट हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर क्षेत्र में बिजली के नाम पर रोजाना 200 रुपए और जगह के नाम पर 500 रुपए वसूले जाते हैं, साथ ही स्थानीय स्तर पर अवैध वसूली और मारपीट का सामना भी करना पड़ता है।
ग्वालियर की रहने वाली मंजिता देवी ने इस हादसे के लिए प्रशासनिक व्यवस्थाओं को दोषी ठहराया है। उनका सवाल था कि जब मंदिर मार्ग पर सामान्य दिनों में बाइक तक के प्रवेश पर पाबंदी होती है, तो वहां भारी-भरकम ट्रक कैसे पहुंच गया। उनका करीब एक लाख रुपए का सामान बिना बिके ही रह गया, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में नवमी की सुबह ही दुकान समेटनी पड़ी। भितरवार की रहने वाली 80 वर्षीय कस्तूरी देवी ने भी कारोबार ठप होने से हुए भारी आर्थिक नुकसान और कर्ज की स्थिति पर दुख जताया है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!