ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) सहित मध्य प्रदेश के तमाम सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अपनी सेवाएं दे रहे एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों में गहरा असंतोष व्याप्त है। लंबी और कठिन शिफ्टों में काम करने के बावजूद इन डॉक्टरों को देश के अन्य राज्यों के मुकाबले काफी कम स्टायपेंड दिया जा रहा है।

प्रतिदिन के हिसाब से 477 रुपए पर कर रहे काम

मौजूदा नियमों के तहत प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों को प्रतिमाह केवल 14,337 रुपए का भुगतान किया जाता है। यदि इसे रोजाना के हिसाब से आंका जाए तो यह राशि महज 477 रुपए बैठती है, जो कि मौजूदा समय में एक अकुशल मजदूर की न्यूनतम दिहाड़ी के लगभग बराबर है।

अन्य राज्यों के मुकाबले भारी अंतर

पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों को 25 हजार रुपए प्रतिमाह दिए जा रहे हैं, वहीं ओडिशा में यह राशि 44,319 रुपए तक है। इस प्रकार ओडिशा के मुकाबले मध्य प्रदेश के डॉक्टरों को प्रति माह करीब 30 हजार रुपए कम मिल रहे हैं।

इस भारी आर्थिक विसंगति के कारण प्रदेशभर में लगभग 3,600 इंटर्न डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इन सभी की मांग है कि स्टायपेंड की राशि को बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपए किया जाना चाहिए।

बजती है घंटी, पर चलाना पड़ता है घर से खर्च

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन जीआरएमसी के अध्यक्ष डॉ. धुआराम गुर्जर ने सरकार पर इंटर्न के साथ सौतेला बर्ताव करने का आरोप लगाया है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मंहगाई के दौर में 14,337 रुपए में शहर के भीतर कमरा या हॉस्टल का किराया देना, मेस का बिल चुकाना, पढ़ाई के लिए किताबें खरीदना और अन्य बुनियादी जरूरतें पूरी करना बेहद मुश्किल हो गया है।

इसके अलावा भुगतान की प्रक्रिया भी पेचीदा है। संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष द्वारा इंटर्नशिप पूरी होने का प्रमाण पत्र दिए जाने के बाद ही स्टायपेंड जारी होता है, जिसके चलते कई बार घर से पैसे मंगाकर गुजारा करना पड़ता है। अन्य राज्यों में जहां समय पर स्टायपेंड की समीक्षा होती है, वहीं मध्य प्रदेश में इसमें कोई ठोस इजाफा नहीं हुआ है।