ऐतिहासिक धरोहर की आज हो गई है यह हालत

ग्वालियर के नगर परिषद क्षेत्र आंतरी की ऐतिहासिक कचहरी समय और उपेक्षा की मार झेल रही है। कभी जिले की शीर्ष ग्राम पंचायत के रूप में शान बढ़ाने वाली यह चार सौ साल पुरानी इमारत अब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान इस कचहरी में मजिस्ट्रेट के बैठने की व्यवस्था हुआ करती थी और यहीं से पूरे क्षेत्र के प्रशासनिक कामकाज का संचालन होता था।

लगभग 100 बीघा में फैली है यह जमीन

यह ऐतिहासिक परिसर लगभग 100 बीघा के विशाल भूभाग पर फैला हुआ है। इस धरोहर के संरक्षण और इसके अस्तित्व को बचाने के प्रयास के तहत अतीत में यहां तहसीलदार, पटवारी कार्यालय, बिजली विभाग और बैंक की शाखाएं तक संचालित की जाती थीं। हालांकि, समय बीतने के साथ और कार्यालयों के अन्यत्र स्थानांतरित होने से इस परिसर की रौनक धीरे-धीरे खत्म होती चली गई।

कार्यालय हटने के बाद छा गई पूरी तरह वीरानियत

स्थिति तब और अधिक बिगड़ गई जब वर्ष 2025 में यहां से बची-कुची उप तहसील को भी हटाकर जौरासी रोड पर स्थित हनुमान मंदिर के पास शिफ्ट कर दिया गया। तहसील कार्यालय के वहां से जाने के बाद इस कचहरी परिसर में पूरी तरह सन्नाटा पसर गया और यह जगह असामाजिक तत्वों का ठिकाना बनकर रह गई है।

क्षेत्र के बाशिंदों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस कचहरी से आंतरी का गौरवशाली इतिहास जुड़ा रहा है, उसका इस तरह नेस्तनाबूद होना प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है। नागरिकों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस बहुमूल्य ऐतिहासिक धरोहर को बचाया जाए और इसका पुनरुद्धार किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ी अपने इतिहास से जुड़ी रह सके।