सड़कों पर मवेशियों का डेरा

ग्वालियर शहर के मुख्य मार्गों और बाजारों में आवारा मवेशियों की मौजूदगी आम नागरिकों और वाहन चालकों के लिए गंभीर संकट बन गई है। इन बेसहारा पशुओं के सड़कों पर अचानक आ जाने से आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं और यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

नगर निगम की कार्रवाई और सीमाएं

नगर निगम प्रशासन द्वारा शहर के विभिन्न हिस्सों में विशेष अभियान चलाकर इन मवेशियों को पकड़ने और उन्हें गौशालाओं या सुरक्षित स्थानों पर भेजने का कार्य किया जा रहा है। निगम का दावा है कि रोजाना औसतन 30 मवेशियों को पकड़ा जा रहा है, किंतु कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद सड़कों पर दोबारा पशुओं के झुंड नजर आने लगते हैं।

आमखो, पड़ाव, मुरार, हजीरा और सिटी सेंटर जैसे ग्वालियर के लगभग सभी व्यस्त इलाकों में मवेशियों के सड़क के बीचों-बीच बैठने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। विशेष तौर पर शाम ढलते ही इनकी संख्या में इजाफा हो जाता है, जिससे गुजरने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

संसाधनों की कमी बनी बड़ी बाधा

इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन में सीमित संसाधन भी एक बड़ी रुकावट साबित हो रहे हैं। मवेशियों को उठाने के लिए पूर्व में तीन वाहन संचालित किए जा रहे थे, जिनमें से वर्तमान में एक वाहन खराब हालत में है। ऐसे में केवल दो गाड़ियों के सहारे पूरे शहर के बड़े क्षेत्रफल में कार्रवाई करना अमले के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है।

एक क्षेत्र में कार्रवाई पूरी करने के बाद दूसरे दूरदराज इलाके तक पहुंचने में काफी वक्त लग जाता है, जिसका लाभ उठाकर पशुओं को छोड़ने वाले लोग अपनी गतिविधियों को जारी रखते हैं। बिना कड़े जुर्माने और पशु पालकों पर लगाम कसे इस समस्या पर पूरी तरह काबू पाना निगम के लिए मुश्किल साबित हो रहा है।

अपर आयुक्त ने दिए सख्ती के संकेत

आवारा मवेशियों को सड़कों से हटाने का अभियान निरंतर जारी है और पशुओं को छोड़ने वाले मालिकों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा।

यह बात अपर आयुक्त प्रदीप तोमर ने कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम इस दिशा में पूरी गंभीरता से काम कर रहा है ताकि शहरवासियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।