ग्वालियर शहर में एजी ऑफिस के नजदीक संचालित हो रहे दारुल कुरआन मदरसे पर स्थानीय प्रशासन और मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की संयुक्त टीम ने औचक निरीक्षण किया। इस कार्रवाई के दौरान संस्थान के पास संचालन से संबंधित वैध दस्तावेज नहीं पाए गए, जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे सील करने की कार्रवाई को अंजाम दिया।
बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं में मिली गंभीर लापरवाही
निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि मदरसे के भीतर बच्चों के रहने और खाने-पीने के इंतजाम बेहद खराब स्थिति में थे। बच्चों के बिस्तर अत्यंत गंदे मिले तथा कई बच्चे नियमित रूप से स्कूल भी नहीं जा रहे थे। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बच्चों की देखरेख में भारी खामियां दर्ज कीं।
एसडीएम अतुल सिंह ने जानकारी दी कि यह मदरसा वर्ष 2017 से बिना किसी वैध पंजीकरण के चलाया जा रहा था। यहां ग्वालियर के अलावा दतिया, मुरैना, भिंड और पड़ोसी राज्य राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए बच्चे रह रहे थे।
दो बच्चों के गायब होने के बाद खुला मामला
इस अवैध गतिविधि का खुलासा तब हुआ जब गत 15 सितंबर को 13 वर्ष का एक बच्चा अचानक लापता हो गया था। इसके बाद 19 अक्टूबर को एक अन्य बच्चा भी गायब हो गया था। हालांकि पुलिस ने दोनों बच्चों को तलाश लिया था, लेकिन इस घटनाक्रम के बाद से मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया।
इसी क्रम में शुक्रवार को बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा के मार्गदर्शन में प्रशासनिक दल ने संस्थान की गहन छानबीन की और गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर सख्त कदम उठाया गया।
बच्चों को अलग-अलग संरक्षण गृहों में भेजा गया
कार्रवाई के दौरान रेस्क्यू किए गए कुल 26 बच्चों में से 8 बालिकाएं और 18 बालक शामिल हैं। इनमें 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग की पांच बालिकाओं को मां कैला देवी वन स्टॉप सेंटर भेजा गया है, जबकि 6 वर्ष से कम उम्र की तीन बच्चियों को शिशु गृह में रखा गया है। इसके अलावा 18 लड़कों को बाल सुधार गृह के सुपुर्द किया गया है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!